
'मानव सेवा के कार्यों में आगे आएं सामाजिक संस्थान'
अहमदाबाद. हरेक सामाजिक, धार्मिक और सेवाभावी संस्थानों को मानव सेवा के उमदा कार्यों में आगे आना चाहिए। जरूरतमंदों की मदद करनी चाहिए। मौजूदा समय में देखा जा रहा है कि लोग जन्म दिन, विवाह और अन्य कार्यक्रमों में फिजूलखर्ची करते हैं उसे बंद करना चाहिए और इन पैसों को लोक कल्याण लगाना चाहिए। लेट्स हेल्प संस्था की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में आचार्य संजय मुनि महाराज ने प्रवचन दे रहे थे।
उन्होंने कहा कि लोग एकदूसरे का दिखावा करते हैं और फिजूलखर्ची करते हैं। ऐसे खर्चों को रोकना चाहिए उसे लोक कल्याण में खर्च करना चाहिए। प्रत्येक सामाजिक, धार्मिक और सेवाभावी संस्थाओं को उमदा कार्यों के लिए आगे आने चाहिए और समाज के जरूरतमंदों की जरूरत को पूरा करना चाहिए। लेट्स हेल्प संस्था ने फुटपाथ पर सोने वालों और झोपड़पट्टी में रहने वालों को 300 टैन्ट, एक हजार से ज्यादा कम्बल और एक हजार राशनकीट वितरित किए। संस्थान के ट्रस्टी दिनेश पटेल और कोर्डिनेटर अनिल संघवी ने कहा कि मानव सेवा ही प्रभु सेवा के लक्ष्य को लेकर संस्था कार्य करती है। जरूरतमंदों और गरीबों की सेवा करती है। महाराज संजय मुनि के जन्मोत्सव गरीबों को टैंट, कम्बल और राशन किट वितरित की गईं। धरनेन्द्र पद्मावती जागृति मंडल मैनेटिजंग ट्रस्टी धीरू संघवी, किरीट शाह, जैविक शाह, पंकज जैन, निलेश प्रजापति, हरेश कच्छी, भाविक, युवराज, किरण वोरा और वंदनसिंह झाला इस मौके पर उपस्थित थे।
'सत्य को जानने का प्रयत्न करना मनुष्य की विशेषता'
अहमदाबाद, मनुष्य एक चिंतनशील प्राणी है। वह जो कुछ भी देखता-सुनता है, उसी पर चिंतन करने लगता है। चिंतन करना, गहन विचार करना और सत्य को जानने का प्रयत्न करना मनुष्य की विशेषता है। जो मनुष्य पशुओं की भांति खाता, पीता और सोता रहकर जीवन बिता देता है, उसे पशु की ही संज्ञा दी जाती है। वह मनुष्य के रूप में पशु ही है। मनुष्य ने बुद्धि के द्वारा चिन्तन के आधार पर ज्ञान, विज्ञान, कला, धर्म और संस्कृति की रचना की है, जो मानव जाति की एक महत्वपूर्ण निधि है। जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी नारायणानंद तीर्थ महाराज घोडासर में स्मृति मंदिर के निकट मिर्ची मैदान में नारायण सेवा समिति की ओर आयोजित श्रीमद्भागवत ज्ञानयज्ञ में यह प्रवचन दिया। उन्होंने बताया भारतीय ऋषियों ने प्रकृति की गोद में बैठकर, प्राकृतिक सौंदर्य में रस विभोर होकर, केवल बुद्धि के सहारे चिन्तन ही नहीं किया, बल्कि अपने भीतर गहरे पैठकर बुद्धि से परे जाकर शाश्वत सत्य की अनुभूति की। उसे मन की आँखों से देखा। उसका दर्शन किया।
Published on:
22 Dec 2018 10:36 pm
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