
राज्यों में सुगम्य भारत अभियान की सुस्त चाल, १२ राज्यों में एक भी सरकारी इमारत नहीं बन सकी सुगम्य
नगेन्द्र सिंह
अहमदाबाद. आम लोगों की तरह दिव्यांगजनों को भी सरकारी इमारतों में आसानी से सभी सुविधाएं सुलभ कराने को छेड़ा गया सुगम्य भारत अभियान देश के राज्यों में सुस्त चाल से आगे बढ़ता दिख रहा है।
इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि इस अभियान के तहत ३५ राज्य-केन्द्र शासित प्रदेशों में राज्य सरकार की स्वामित्ववाली सरकारी इमारतों को सुगम्य बनाने के लिए स्वीकृत किए गए ११९१ कार्यों में से केवल ५७७ प्रतिशत कार्य ही पूरे हो पाए हैं। यानि लक्ष्य में से केवल ४८.४४ प्रतिशत कार्य ही पूरे हुए हंै। ६४१ कार्य बाकी हैं। यह तथ्य हाल ही में लोकसभा में पेश की गई जानकारी में सामने आए हैं। इसके तहत इन इमारतों में दिव्यांगनों के प्रवेश के लिए रैंप बनाने, सुगम्य लिफ्ट, सुगम्य शौचालय, प्रवेश द्वार के पास ही पार्किंग, सुगम्य पेयजल, मे आई हेल्प यू का बूथ लगाने और साइनेज की सुविधा सुनिश्चित करना शामिल है।
मध्यप्रदेश-कर्नाटक पूरा नहीं हुआ एक भी कार्य
देश के १२ राज्यों में सुगम्य भारत अभियान के तहत स्वीकृत सरकारी इमारतों में से अब तक एक भी कार्य (सरकारी इमारत) को पूरा नहीं किया जा सका है। इनमें मध्यप्रदेश, कर्नाटक, केरल, हिमाचलप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, आंध्रप्रदेश, झारखंड, गोवा, असम, त्रिपुरा, पुड्डुचेरी, नागालैंड शामिल हैं। मध्यप्रदेश में ३१, कर्नाटक में ४७, पुड्डुचेरी में २९ इमारतों (कार्य) को इस योजना के तहत स्वीकृत किया गया है। लेकिन एक भी कार्य पूरा नहीं हो पाया है।
महाराष्ट्र ने सर्वाधिक १३५ इमारतें बनाई सुगम्य
कुछ राज्यों ने इसमें काफी अच्छा कार्य करके दिखाया है, जिसमें संख्या के लिहाज से महाराष्ट्र ने स्वीकृत १४२ सरकारी इमारतों (कार्य) में से १३५ इमारतों (कार्य) को सुगम्य बनाने का कार्य पूरा किया है। प्रतिशत के लिहाज से बिहार ने स्वीकृत २१ में से २१ इमारतों को सुगम्य बनाया है। उत्तरप्रदेश ने स्वीकृत १३७ में से ८७, राजस्थान ने ८८ में से ७८, गुजरात ने २६ में से २४ इमारतों को सुगम्य बनाने का कार्य पूरा कर लिया है। देश की राजधानी दिल्ली में स्वीकृत १८ में से केवल ३ कार्य ही पूरे हुए हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में इनकी संख्या ३३ स्वीकृत कार्य में १७ की रही। छत्तीसगढ़ में ४२ में से २० कार्य पूरे हुए हैं।
कोरोना ने रोकी राह, धीमी प्रगति भी वजह
केन्द्र सरकार ने बताया कि स्वीकृत कार्य के पूरे नहीं होने की प्रमुख वजह योजना का क्रियान्वयन कराने वाली एजेंसी की ओर से कार्यान्वयन में धीमी प्रगति रही। कोरोना महामारी के चलते भी कार्य प्रभावित हुआ। केन्द्रीय सलाहकार बोर्ड की २६ नवंबर २०२० को हुई बैठक में अब इन कार्यों को पूरा करने की समय सीमा को १४ जून २०२२ तक बढ़ा दिया है।
सरकारी लोगों में संवेदना की कमी
केन्द्र सरकार की ओर से स्वीकृति मिलने के बावजूद भी जब 12 राज्यों में एक भी कार्य पूरा नहीं हो रहा है। यह दर्शाता है कि दिव्यांगजनों के प्रति सरकार में बैठे लोगों में संवेदना की कितनी कमी है। दिव्यांगजनों को मदद के साथ प्रोत्साहन की जरूरत है। अवसर की जरूरत है ताकि वे आगे बढ़ सकें लेकिन उन्हें दिव्यांगता प्रमाण-पत्र लेने से लेकर सरकारी कार्यालय में पहुंचने तक में दिक्कत होती है।
-समीर कक्कड़, अध्यक्ष, ऑल इंडिया हैंडीकेप एसोसिएशन, अहमदााबाद
सुगम्य भारत अभियान के तहत स्वीकृत-पूर्ण कार्य
राज्य स्वीकृत कार्य पूर्ण कार्य
महाराष्ट्र- १४२ -१३५
उत्तरप्रदेश- १३७ -८७
राजस्थान- ८८ -७८
चंडीगढ़- ४३ -३९
ओडिशा- ४० -२६
सिक्किम- ३५ -२६
गुजरात- २६ -२४
अंडमान निकोबार- २५ -२३
बिहार- २१ -२१
छत्तीसगढ़- ४७ -२०
पश्चिम बंगाल- ३३ -१७
(स्त्रोत: लोकसभा में पेश आंकड़े)
Published on:
28 Mar 2022 09:20 pm
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