1 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अहमदाबाद

कच्छ के शिक्षक ने तैयार किया भारत में पहली बार चलता-फिरता डिजिटल पढाई रथ

आज शिक्षक दिवस पर विशेष दीपक मोता को मिलेगा राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार कोरोनाकाल में कार, सोलर ई-बाइसकिल, गुजरात में पहली बार एटीएम सरीखा एनी टाइम एजुकेशन (एटीइ) शिक्षा कियोस्क

Google source verification

राजेश भटनागर

अहमदाबाद. भारत में कार पर पहली बार चलता-फिरता डिजीटल रथ तैयार कर पढ़ाई का कार्य शुरू करने वाले गुजरात के कच्छ जिले के प्राथमिक विद्यालय के मुख्य शिक्षक दीपक मोता को मंगलवार को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।कोरोनाकाल में लॉकडाउन के दौरान ऑफलाइन पढ़ाई बंद थी और ऑनलाइन पढ़ाई में मोबाइल, लैपटॉप और इंटरनेट की सुविधा न होने के कारण विद्यार्थियों का शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा था। उस समय कच्छ जिले की मांडवी तहसील के बाग गांव के श्री हुंदराईबाग वाडी प्राथमिक विद्यालय के मुख्य शिक्षक मोता ने नवाचार में रूचि के चलते भारत में कार पर पहली बार चलती-फिरती डिजीटल पढ़ाई की शुरुआत की। 29 नवंबर 1979 को कच्छ जिले की मांडवी तहसील के मस्का गांव में जन्मे और एमए, डीपीएड की पढ़ाई करने वाले मोता पिछले 17 वर्षों से अध्यापन करा रहे हैं।

जुलाई 2020 से फरवरी 2022 तक कुल 17 महीने तक मोता ने अपने खर्च पर कार में चलते-फिरते डिजिटल स्कूल के जरिए मांडवी तहसील में घूमकर विद्यार्थियों को शिक्षा देने का बीड़ा उठाया।

उन्होंने कार में ऑडियो-विजुअल सिस्टम रखा और गांवों में पहुंच कर विद्यार्थियों को एकत्र कर शिक्षित किया। वे जहां भी जाते, विद्यार्थी कार के आसपास बैठ जाते। ऐसे विद्यार्थियों को उन्होंने नि: शुल्क शिक्षा दी।

कार नहीं पहुंचने पर बनाई ई-बाइसिकल

इस दौरान मोता को अपने कार्य से संतोष था, लेकिन गांवों में जहां यह रथ नहीं पहुंच सकता था, ऐसी जगह पर रहने वाले विद्यार्थियों की चिंता करते हुए उन्होंने ई-बाइसिकल बनाई। साइकिल पर सोलर पैनल लगाकर ई-बाइसिकल डिजिटल मोबाइल स्कूल को गांव में जाकर विद्यार्थियों को शिक्षित किया।

उन्होंने खुद के खर्च पर बाग गांव में पैडल और मोटर से चलने वाली ई-बाइसिकल पर कहीं भी रखने वाली स्क्रीन के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाया।कोरोना की तीसरी लहर में एक बार फिर सरकार ने स्कूल बंद किए। तब उन्होंने गुजरात में पहली बार एटीएम सरीखा एनी टाइम एजुकेशन (एटीइ) शिक्षा कियोस्क बनाए। इनमें पाठ्यक्रम को ऑडियो-विजुअल सिस्टम पर अपलोड किया गया। मांडवी तहसील के मस्का और बाग गांव में मुख्य बाजार में यह कियोस्क लगाए। गुजराती माध्यम के कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों ने कियोस्क पर जाकर शिक्षा प्राप्त की।

इस साल प्रोजेक्टर सहित एजुकेशन थिएटर बनाया

शिक्षा में नवाचार के अलावा गायन, खेल, अभिनय, नाटक लेखन में उनकी रूचि है। मोता ने केवल कोरोनाकाल में ही नवाचार नहीं किए। एक कदम आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इस साल प्रोजेक्टर सहित एजूकएशन थियेटर बनाया। दानदाताओं के सहयोग से विद्यार्थियों को डिजीटल माध्यम से शिक्षित करने के उद्देश्य से पाठ्यक्रम को ऑडियो-विजुअल सिस्टम पर अपलोड किया। विद्यार्थी अब थिएटर में बैठकर फिल्म देखने के बजाए इस थिएटर से शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।

अब तक मिले 21 पुरस्कार

शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने के लिए मोता को अब तक विभिन्न शैक्षणिक एवं सामाजिक संगठनों की ओर से 21 पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं।