
एनएफएसयू गांधीनगर परिसर।
नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) में देश का पहला इमरजेंसी टॉक्सिकोलॉजी सेंटर (आपातकालीन विष विज्ञान केन्द्र) स्थापित किया जाएगा। जल्द ही देश के इस एकमात्र सेंटर की एनएफएसयू के गांधीनगर परिसर में शुरूआत होगी। इसके लिए ज्यादातर उपकरण खरीदी लिए गए हैं वहीं विशेषज्ञ और स्टाफ भी तैयार हैं।
यह सेंटर संदिग्ध विषाक्तता (सस्पेक्टेड पॉयजनिंग) के मामलों में मरीज की जान बचाने और उसका उपचार करने में चिकित्सकों के लिए काफी मददगार होगा। इस सेंटर में देश-विदेश में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के जहर का विश्लेषण (एनालिसिस) कर उसकी जांच (डिटेक्शन) की जाएगी। साथ ही यह पता लगाया जाएगा कि संदिग्ध जहर क्या है। फिलहाल जहर की जांच और विश्लेषण करने वाला देश में ऐसा कोई केन्द्र नहीं है।
एनएफएसयू के कुलपति डॉ.जे.एम.व्यास ने कहा कि आजकल संदिग्ध विषाक्तता के मामलों में रोगी को उचित उपचार प्रदान करना डॉक्टरों के लिए कठिन हो रहा है। ऐसे में एनएफएसयू का यह सेंटर संदिग्ध जहर के बारे में जांच कर उसकी पूरी जानकारी देगा। इससे चिकित्सक उस जहर के प्रभाव, गंभीरता और प्रभाव के अनुरूप पीड़ित मरीजों का बेहतर तरीके से उपचार कर सकेंगे। इससे उनकी जान बचाने में काफी मदद मिलेगी। एनएफएसयू में स्थापित इस केंद्र का मुय उद्देश्य संदिग्ध जहर की पहचान करना और विश्लेषण में डॉक्टर-अस्पतालों की मदद करना है।
एनएफएसयू का यह केंद्र जहर के इस क्षेत्र में काम करने वाले इमरजेंसी, क्रिटिकल केयर चिकित्सक, फोरेंसिक एक्सपर्ट, टॉक्सिकोलॉजिस्ट, लैब टेक्नीशियन सहित अन्य को जहर पहचानने, उसका विश्लेषण करने का उचित प्रशिक्षण भी प्रदान करेगा। जहर व उसके प्रभाव के संबंध में शोध कार्य भी करेगा। इससे जहर को पहचानने व उसके एंटी डोज को विकसित करने के द्वार खुलेंगे। थेरप्यूटिक ड्रग मॉनीटरिंग भी भविष्य में शुरू की जाएगी, जिससे दवाईयों के साइड इफैक्ट की जांच में मदद मिलेगी। भविष्य में यह केंद्र लोगों को संदिग्ध बीमारियों और जहर के बारे में जानकारी देने, उससे बचाव के उपाय सुझाने के लिए जन जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करेगा।
Published on:
18 Aug 2024 10:50 pm
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