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यह किसके जैसा मंदिर है

निष्कलंक महादेव @ सिंधु सागर गुजरात
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यह किसके जैसा मंदिर है

यह किसके जैसा मंदिर है

उपेन्द्र शर्मा

अहमदाबाद. यह भगवान शिव का ठीक वैसा ही मंदिर है जैसा रामेश्वरम में है। महाभारत काल में पाण्डवों ने यहां तपस्या की थी और ५ शिवलिंगों की स्थापना की थी। १८ दिनों के युद्ध ने मानवता को भीषण क्षति पहुंचाई थी। पाण्डव उसकी ग्लानि में थे। तब ऋषि दुर्वासा ने उन्हें यहां पहुंचकर भगवान शिव की तपस्या कर कलंक मुक्त होने को कहा था।
आज भी दिन भर में दो बार समुद्र देव स्वयं महादेव का जलाभिषेक करते हैं। आज सप्तमी थी तो समुद्र देव ने शाम करीब ६ बजे जलभिषेक किया। इस दौरान मंदिर समुद्र में डूब जाता है। कल अष्टमी को शाम को सात और दोपहर १२ बजे यह जलाभिषेक होगा।
अद्भुत दृश्य होता है। मंदिर से करीब १-२ किलोमीटर दूर नज़र आने वाला समुद्र पल भर में ही मंदिर को अपनी गोद में ले लेता है और करीब २-३ घन्टे बाद समुद्र पीछे हो जाता है तो भोलेनाथ के फ़िर से दर्शन होते हैं। इस दौरान दर्शन करने वाले लोग समुद्र में ही पैदल चल कर महादेव तक जाते हैं। यहां सूर्योदय का बेहद सुन्दर दृश्य बनता है करीब सुबह ६ बजे।
यह भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद है कि यहां भी पानी बाकि सागर तटों की तरह खारा ही है परन्तु यहां स्नान करने के दौरान किसी तरह की खुजली, खराश या संक्रमण नहीं होता। यह तट पेशेवर पर्यटन गतिविधियों से अछूता ही है। ऐसे में यहां कोई भीड़-भाड़ और प्रदूषण, शोर आदि नहीं है। अगर आप शान्तिपूर्वक समुद्र तट पर कुछ दिन गुजारना चाहते हैं तो यह तट आपको असीम शान्ति प्रदान करेगा।