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यूक्रेन में युद्ध से प्रभावित हो सकता है मोरबी का सिरेमिक उद्योग

ukrain, war, ceramic industries, effected, tiles: मोरबी का सिरेमिक से जुड़े उत्पाद पूर्वी यूरोपीय देशों में किए जाते हैं निर्यात, टाइल्स बनाने के लिए मंगाई जाती है चिकनी मिट्टी

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यूक्रेन में युद्ध से प्रभावित हो सकता है मोरबी का सिरेमिक उद्योग

यूक्रेन में युद्ध से प्रभावित हो सकता है मोरबी का सिरेमिक उद्योग

पुष्पेन्द्र सिंह/उदय पटेल

गांधीनगर. रूस की ओर से यूक्रेन में जंग छिडऩे का न सिर्फ गुजरात बल्कि देश के कारोबार पर भी पडऩे की आशंका है। यदि यह युद्ध लम्बा खींचता है तो इसका असर गुजरात में मोरबी के सिरेमिक उद्योग पर भी पड़ सकता है। मोरबी में करीब एक हजार इकाइयां हैं, जिसमें ज्यादातर इकाइयां यूक्रेन तथा इससे लगती पूर्वी यूरोपीय देशों-पोलैण्ड, हंगरी, आस्ट्रिया, स्लोवाकिया के साथ-साथ मध्य एशियाई देशों को निर्यात की जाती है।

मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्रीज के पदाधिकारी जयसुख पटेल ने बताया कि मोरबी के सिरेमिक से जुड़े उद्योगों की ओर से प्रति वर्ष २५ हजार करोड़ का सिरेमिक से जुड़ा उत्पाद निर्यात किया जाता है। इनमें से एक हजार करोड़ से ज्यादा का माल पूर्वी यूरोपीय देशों को निर्यात होता है। यदि यही स्थिति बनी रही तो इन देशों को टाइल्स निर्यात पर असर पड़ सकता है।

गैस के दामों का भी पड़ सकता है असर

युद्ध के ज्यादा लंबे चलने से गैस के दामों पर असर पड़ सकता है। मोरबी की इकाइयों को पाइप लाइन से जो गैस आपूूर्ति की जाती है और युद्ध के चलते गैस के दामों में वृद्धि हो सकती है। गैस के दामों में बढ़ोत्तरी के चलते उद्योगों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

यूक्रेन के बॉल क्ले की मांग में अब कमी

इंड़स्ट्री के लोगों ने बताया कि कुछ वर्ष पहले यूक्रेन से सिरेमिक टाइल्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली चिकनी मिट्टी (बॉल क्ले) यूक्रेन से मंगाई जाती थी। यह मिट्टी अच्छी और सस्ती होती है, हालांकि अब यह काफी कम मात्रा में मंगाई जाती है। पिछले कुछ वर्षों से इसकी मांग कम हो गई है क्योंकि इसे अब राजस्थान से मंगाया जाता है। हालांकि यूक्रेन में मिट्टी के दाम बढऩे और मंगाने का खर्च बढऩे से कई कारोबारियों ने वहां से मिट्टी मंगाना कम कर दिया। सिरेमिक उद्योग के कारोबारी चुन्नी भाई कहते हैं कि अभी भी यूक्रेन से बॉल क्ले मंगाई जाती है, लेकिन फिलहाल मोरबी के सिरेमिक उद्योग पर इसका असर नहीं दिखेगा। यदि युद्ध लम्बा चलता है तो इसका असर जरूर दिख सकता है।

सिरेमिक टाइल्स उत्पादन का हब है मोरबी

गुजरात का मोरबी देश भर में सिरेमिक टाइल्स उत्पादन का हब माना जाता है। यहां ७० से ८० फीसदी से ज्यादा टाइल्स और सेनेटरी उत्पाद बनाए जाते हैं। मोरबी में करीब एक हजार इकाइयां हैं, जिसमें चार सौ से ज्यादा ऐसी इकाइयां हैं जो खाड़ी देशों में अपने उत्पाद निर्यात करती हैं। इसके अलावा ज्यादातर इकाइयां यूक्रेन से लगती पूर्वी यूरोपीय देशों-पोलैण्ड, हंगरी, आस्ट्रिया, स्लोवाकिया के साथ-साथ मध्य एशियाई देशों को निर्यात की जाती है। इस उद्योग के जरिए चार लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है।

अब राजस्थान से आता है कच्चा माल

सिरेमिक प्रोडक्टस बनाने के लिए ७० फीसदी कच्चा माल राजस्थान के राजसमंद समेत अलग-अलग जिलों से मंगाई जाती है। इनमें मिनरल पाउडर, मार्बल स्लरी, चाइना क्ले व चीनी मिट्टी शामिल है। साथ ही यूक्रेन से भी मोरबी के सिरेमिक उत्पाद बनाने के लिए चिकनी मिट्टी मंगाई जाती है, जो मुलायम और चमकदार होती है। इस मिट्टी से बनने वाली टाइल्स आकर्षक और चमकदार होती हैं।