
साधु-संतों की मौजूदगी में आमरण अनशन पर बैठे किसान।
मोरबी. जिले के जेतपर गांव में किसानों ने मुआवजे की मांग को लेकर गुरुवार से आमरण अनशन आंदोलन शुरू किया। फिलहाल पांच किसान आमरण अनशन पर बैठे हैं। गांव में रैली निकालकर अनशन आंदोलन शुरू किया गया।जानकारी के अनुसार कच्छ, मोरबी और सुरेंद्रनगर जिलों से गुजरने वाली निजी बिजली कंपनी की लाइन और बिजली के खंभे लगाने के मुद्दे पर किसान विरोध कर रहे हैं।
मोरबी जिले के कई गांवों में विरोध के बीच जेतपर गांव में किसानों ने आंदोलन शुरू किया था। पहले एक सप्ताह तक धरना दिया गया, उसके बाद गांधीनगर तक ट्रैक्टर रैली निकाली गई। ट्रैक्टर रैली के राजनीतिक रूप लेने पर किसान उससे अलग हो गए और अब जेतपर गांव में आंदोलन के दूसरे चरण के रूप में आमरण अनशन शुरू किया गया है।
किसानों के खेतों से निजी कंपनी की गुजर रही बिजली लाइन और बिजली के खंभों के लिए अपर्याप्त मुआवजे को लेकर किसानों में असंतोष है। जेतपर गांव में कैलाशगिरि, रतिलाल अमृतिया, नेहुल अमृतिया, रामजी भाडजा और निलेश एरवाडिया सहित पांच किसानों ने आमरण अनशन शुरू किया।
आंदोलन के पहले दिन गांव के रामजी मंदिर से रैली निकालकर सभी लोग अनशन स्थल पहुंचे। इसमें बड़ी संख्या में महिलाओं सहित किसान खेती के उपकरणों के साथ रैली में शामिल हुए। अनशन आंदोलन के संबंध में श्रम व रोजगार राज्यमंत्री कांति अमृतिया के भाई रतिलाल अमृतिया उर्फ काराभाई ने कहा कि किसानों को परेशानी है और किसान अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। फिलहाल गांधी मार्ग पर आंदोलन चल रहा है, लेकिन आवश्यकता पड़ने पर सरदार पटेल के मार्ग पर जाने से भी नहीं हिचकेंगे।
उन्होंने कहा कि केवल जेतपर ही नहीं, जिले के सभी गांवों के किसानों का समर्थन प्राप्त है। सरकार से हाथ जोड़कर विनती कर चुके हैं। जब मोबाइल टावर लगाने का किराया मिलता है तो किसानों के खेतों में खंभे लगाने का किराया क्यों नहीं मिलना चाहिए?
उन्होंने कहा कि राज्यमंत्री कांति अमृतिया उनके सगे भाई हैं, लेकिन राजनीति और खेती अलग-अलग विषय हैं। कांतिभाई ने भी प्रयास किए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसलिए अब किसान संघर्ष कर रहे हैं। फिलहाल जेतपर गांव में आंदोलन शुरू हुआ है, बाद में अन्य गांवों में भी आंदोलन किया जाएगा।
दूसरी ओर, महिलाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखना शुरू किया। कई महिलाओं ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर किसानों की समस्या बताई। महिलाओं का कहना है कि वे मांग कर रही हैं कि किसानों की पीड़ा सुनी जाए।
अनशन कर रहे नेहुल अमृतिया ने कहा कि किसानों को परिपत्र के अनुसार नहीं, बल्कि कानून के अनुसार मुआवजा दिया जाए। केंद्र सरकार की गाइडलाइन में भी एकमुश्त भुगतान और अग्रिम भुगतान का प्रावधान है। जेतपर गांव से निजी कंपनी की 665 केवी की 20 लाइनें, 800 केवी के 12 खंभे, तार वाली 100-120 लाइनें और 800 केवी की 70-80 लाइनें गुजर रही हैं। इससे लगभग 300 से अधिक किसानों के सर्वे नंबर प्रभावित होंगे।
Published on:
18 Jun 2026 10:11 pm
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