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पानी के लिए पानी-पानी होता सुरेन्द्रनगर

रियासत काल के दौरान गुजरात के झालावाड़ से झाला राजपूतों ने यहां अपने क्षेत्र का विस्तार किया था। इसी वजह से इसे गुजरात का झालावाड़ भी कहते हैं। आजादी

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Water for water was Surendranagar

Water for water was Surendranagar

सुरेन्द्रनगर।रियासत काल के दौरान गुजरात के झालावाड़ से झाला राजपूतों ने यहां अपने क्षेत्र का विस्तार किया था। इसी वजह से इसे गुजरात का झालावाड़ भी कहते हैं। आजादी के बाद से यह सुरेन्द्रनगर के नाम से जाना जाता है। जिले में पांच विधानसभा क्षेत्र में 12.33 लाख मतदाता है। तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकास-विकास-विकास मंत्र की पोल जिला मुख्यालय में ही देखने को मिलती है। सप्ताह में एक दिन पानी आता है। संग्रह करके अगले छह दिन इसी को काम में लिया जाता है। टूटी सडक़ें, खराब ड्रेनेज जगह-जगह गंदगी, अव्यवस्थित यातायात, अतिक्रमण बताता है कि शहर अभी विकास से 50 साल दूर ही है।

जिले के पांच विधानसभा क्षेत्रों में वढ़वाण जिसमें जिला मुख्यालय सुरेन्द्रनगर भी आता है। यहां 2.67 लाख मतदाता हैं। दो बार से भाजपा की विधायक वर्षा दोशी ही बन रही हैं। शहर में ज्यादातर लोग उनके काम से नाखुश हैं। उन्हें शहर को विकास की बजाय विनाश की ओर धकेलने वाला बताते हैं। सीवरेज लाइन डालने के बहाने बची-खुची सडक़ भी टूट गई। यहां सर्वाधिक 24 हजार कोली मतदाता हैं। पाटीदार 12000 , जैन 12000, ब्राह्मण 16000 मतदाता हैं। धोराधजा डैम से साप्ताहिक पानी आता है, जो अफोर्ड कर सकते हैं वे तो आरओ. के कैन मंगा लेते हैं। अन्या निम्न मध्यम व निम्न वर्ग संग्रहित पानी को ही छान-छानकर काम में लेता है। अश्विन शाह व जयेश बताते हैं कि इस जिले से तो डांग जिले का अच्छा विकास हुआ है।

ध्रांगध्रा से जयंती कवाडिय़ा लगातार चार बार से विधायक हैं। ये फिलहाल मंत्री भी हैं। यहां 2.78 लाख मतदाता हैं। फील्ड क्षेत्र का सेना का सबसे बड़ा केन्द्र हैं। सेना की वजह से काफी रोजगार मिला हआ है। अर्थ व्यवस्था में भी सुधार हुआ है। यहां 2.78 लाख मतदाता हैं। इनमें क्षत्रियों के सर्वाधिक वोट हैं। पानी की समस्या तो यहां भी है।

दसाड़ा अनुसूचित जाति की सुरक्षित सीट है। पूनम मकवाणा भाजपा के विधायक हैं। यहां 2.37 लाख मतदाता हैं। 2.42 लाख मतदाताओं की चोटीला सीट से सामजी चौहान भाजपा विधायक हैं। यहां राजकोट का नया हवाई अड्डा आने से क्षेत्र के लोग गौरवान्वित तो हैं पर फसल बीमा, कपास व मूंगफली का उचित दाम न मिलने पर अपनी नाराजगी जताते हैं।
वर्ष 2012 के चुनाव में लीम्बड़ी सीट ही कांग्रेस ने जीती थी। बाद में सोमाभाईपटेल पार्टी बदलकर भाजपा में आ गए। उपचुनाव में यह सीट भाजपा ने हथिया ली। यहां 2.59 लाख मतदाता हैं। राजकोट-अहमदाबाद हाइवे से जुड़ा होने के कारण यहां लिंक सडक़ें भी अच्छी हैं।

कुल मिलाकर जिले की चुनावी चर्चा अभी उदासीन है। शहर के भाजपा व कांग्रेस कार्यालयों विधानसभा क्षेत्र में कितने मतदाताओं के आंकड़े तक नहीं हैं। भाजपा के योगेशभाई व कांग्रेस के नरेन्द्र पंड्या जिला कार्यालय के प्रभारी हैं, पर आंकड़े दोनों के पास ही नहीं हैं। कहते हैं कि प्रदेश कार्यालय से सब तैयारी हो रही है।

पटेल आरक्षण के मुद्दे का असर है। हालांकि जीएसटी का असर अब हल्का हो रहा है। इस सबसे ज्यादा यहां मूलभूत सुविधाओं के अभाव के स्थानीय मुद्दे हैं, जिनमें पानी की नियमित आपूर्ति न होना। टूटी सडक़ें, ग्रामीण क्षेत्रों में फसल बीमा व फसल का उचित मूल्य न मिलने के अलावा बेरोजगारी से अपराध दर भी बढ़ रही है। पानी की बात करते ही लोग पानी-पानी हो जाते हैं। कहते हैं राजस्थान के रेगिस्तान में भी ऐसी स्थिति नहीं होगी, जो यहां है। नरेन्द्र मोदी की वजह से यहां वोट मिलते हैं। इस बार फिर देखना है कि कैसे उम्मीदवार आते हैं और समीकरण क्या बैठता है।

राजेन्द्रसिंह नरुका