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जब अहमदाबाद को बनाना था ‘मेरिटाइम सिटी’, 1894 की योजना फिर आई सुर्खियों में

Ahmedabad: शहर के 616वें स्थापना दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक माणेक बुर्ज में स्वामीनारायण गादी संस्थान ने 1894 के एक अधूरे सपने को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया। स्थापना दिवस के इस विशेष मौके पर आचार्य जितेन्द्रिय प्रियदास की अध्यक्षता में इतिहासकार डॉ. रिज़वान कादरी की ओर से शोधित ग्रंथ ‘साबरमती नेविगेशन : […]

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Ahmedabad: शहर के 616वें स्थापना दिवस के अवसर पर ऐतिहासिक माणेक बुर्ज में स्वामीनारायण गादी संस्थान ने 1894 के एक अधूरे सपने को फिर से जीवंत करने का प्रयास किया। स्थापना दिवस के इस विशेष मौके पर आचार्य जितेन्द्रिय प्रियदास की अध्यक्षता में इतिहासकार डॉ. रिज़वान कादरी की ओर से शोधित ग्रंथ ‘साबरमती नेविगेशन : 1894 की अनफुलफिल्ड ब्लूप्रिंट’ का बुधवार को लोकार्पण किया गया।

महंत भगवत प्रियदास ने बताया कि यह ग्रंथ अहमदाबाद के इतिहास के उस महत्वपूर्ण लेकिन कम चर्चित अध्याय को सामने लाता है, जब शहर को ‘मेरिटाइम सिटी’ बनाने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई थी।

इस योजना के तहत खंभात की खाड़ी के माध्यम से समुद्र का पानी अहमदाबाद तक लाने का प्रस्ताव रखा गया था, जिससे शहर को समुद्री व्यापार से जोड़ा जा सके। हालांकि, ब्रिटिश सरकार ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया और यह सपना अधूरा रह गया।

उन्होंने कहा कि आज जब साबरमती रिवरफ्रंट जैसे आधुनिक प्रकल्प साकार हो चुके हैं, तब यह ग्रंथ शहर की ऐतिहासिक दूरदृष्टि और विकास की सोच को समझने का अवसर देता है। स्थापना दिवस के अवसर पर इस ग्रंथ का लोकार्पण अहमदाबाद के गौरवशाली इतिहास और उसके विकास के विजन को याद करने का प्रतीक भी बना।कार्यक्रम में मनपा आयुक्त बंछानिधि पाणि, साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के चेयरमैन आई.पी. गौतम, स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन देवांग दाणी और उप महापौर जतिन पटेल सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। यह ग्रंथ अहमदाबाद के विकास, उसकी ऐतिहासिक सोच और नदियों से उसके गहरे संबंधों को नई दृष्टि से समझने में महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा।