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बेटी ने मना किया तो हम घोड़े पर नहीं बैठे, बची जान

अमरेली का दंपती बोला, पहलगाम में हमले के बाद लौटा परिवार जामनगर. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में बचकर अमरेली का एक परिवार लौट आया। परिवार का कहना है कि पांच साल की बेटी की वजह से उनकी जान बच गई।अमरेली के सावरकुंडला में आपूर्ति विभाग के उप कलक्टर संदीप पाठक, पीजीवीसीएल में […]

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अमरेली का दंपती बोला, पहलगाम में हमले के बाद लौटा परिवार

जामनगर. जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में बचकर अमरेली का एक परिवार लौट आया। परिवार का कहना है कि पांच साल की बेटी की वजह से उनकी जान बच गई।
अमरेली के सावरकुंडला में आपूर्ति विभाग के उप कलक्टर संदीप पाठक, पीजीवीसीएल में क्लर्क के पद पर कार्यरत पत्नी कृष्णा और 5 साल की बेटी मेशवा 17 से 24 अप्रेल तक पैकेज टूर पर कश्मीर गए थे।
उन्हें 22 अप्रेल को दोपहर 12.30 बजे पहलगाम के बैसरन क्षेत्र में जाना था। हालांकि परिवार चार दिनों से घोड़े पर सवार होकर यात्रा कर रहा था। उस दिन बेटी मेशवा ने घोड़े की सवारी करने से मना कर दिया, तो परिवार खाने के लिए दूसरी जगह चला गया।
जब परिवार खाना खाकर बाहर आया तो उन्हें पता चला कि बैसरन इलाके में गोलीबारी हुई है। कुछ ही मिनट बाद सेना की एंबुलेंस और हेलीकॉप्टर दिखने लगे। इसी बीच, संदीप के पास घुड़सवार आया और बताया कि उन्होंने बैसरन जाने के लिए कहा था, लेकिन उसकी जान तब बची जब वह नहीं गया, क्योंकि मेशवा नहीं जाना चाहती थी। इसके बाद घुड़सवार ने मेशवा को साक्षात भगवान माना और उसके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।

'सर, आपकी गुड़िया ने मेरी जान बचाई'

फिलहाल संदीप अपने परिवार के साथ सुरक्षित रूप से अमरेली पहुंच गए हैं। उनकी पत्नी सहित पूरा परिवार इस घटना में बचने के लिए भगवान का शुक्रिया अदा कर रहा है।

संदीप ने कहा कि मेरी बेटी ने घोड़े पर जाने से मना कर दिया, इसलिए हम खाना खाकर महादेव के दर्शन कर रहे थे। तभी घुड़सवार आया और हमें घटना के बारे में बताया। घुड़सवार ने मुझसे कहा सर, हम इसलिए नहीं गए क्योंकि आपकी गुड़िया ने मना कर दिया, आपकी गुड़िया ने मेरी जान बचाई।

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