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‘जाति, समुदाय, धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर ही विकसित भारत का निर्माण संभव’

आणंद. जिले के नापा स्थित आदर्श शैक्षणिक संकुल में ‘विकसित भारत @2047 के निर्माण में एकता, सांस्कृतिक विविधता और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि जाति, समुदाय और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर ही विकसित भारत का निर्माण संभव है।
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'Building a Developed India is Possible Only by Rising Above Caste, Community, and Religious Divisions'

आणंद जिले के नापा में आयोजित कार्यशाला में अतिथि-वक्ता।

आणंद के नापा में ‘एकता, सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्र निर्माण में अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका’ पर कार्यशाला

आणंद. जिले के नापा स्थित आदर्श शैक्षणिक संकुल में ‘विकसित भारत @2047 के निर्माण में एकता, सांस्कृतिक विविधता और अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।
इसमें विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष प्रो. डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा कि जाति, समुदाय और धर्म के भेदभाव से ऊपर उठकर ही विकसित भारत का निर्माण संभव है। देश भर की अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थाओं में अध्ययनरत विद्यार्थियों में लगभग 68.4 प्रतिशत विद्यार्थी अल्पसंख्यक समुदायों के हैं, जबकि 31.6 प्रतिशत विद्यार्थी अन्य समुदायों के हैं। उन्होंने कहा कि यही भारत की वास्तविक शक्ति और विविधता में एकता का परिचायक है। आयोग भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत है।
उन्होंने कहा कि सबसे पहले प्रत्येक व्यक्ति में इंसानियत होना आवश्यक है। एक अच्छा इंसान बनना ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में समाज को कट्टरता और नफरत से बचाकर प्रेम, भाईचारे और सौहार्द की ओर ले जाने की आवश्यकता है। उन्होंने अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों से अपील की कि विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के संस्कार भी विकसित करें। विद्यालयों और महाविद्यालयों में सभी धर्मों एवं समुदायों के त्योहार मिल-जुलकर मनाए जाएं तथा विभिन्न समुदायों के बीच सद्भाव को बढ़ावा दिया जाए।

शिक्षा समाज से हिंसा-नफरत समाप्त करने का सबसे प्रभावी माध्यम : इंद्रेश कुमार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सहयोगी संगठन मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के मार्गदर्शक इन्द्रेश कुमार ने कहा कि हम अतीत में भी एक थे, आज भी एक हैं और भविष्य में भी एक रहेंगे। शिक्षा समाज से हिंसा और नफरत को समाप्त करने का सबसे प्रभावी और सबसे बड़ा हथियार है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रत्येक धर्म और समुदाय के विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल और प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता विकसित करनी होगी। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से सकारात्मक सोच के साथ सभी समुदायों को साथ लेकर कार्य करने की अपील की। कार्यक्रम में आदर्श एजुकेशन कैंपस के ट्रस्टीगण, प्राचार्य इकराम सैयद, जिला शिक्षा अधिकारी कामिनी त्रिवेदी तथा बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।