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झूलता मीनारा अब तक बनी पहेली

साढ़े छह सौ साल पुराना झूलता मीनारा

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झूलता मीनारा अब तक बनी पहेली

अहमदाबाद. जब एक मीनार हिलती है तो थोड़ी देर बाद दूसरी मीनार भी हिलने लगती है। जी हां, अहमदाबाद में ऐसा ही एक झूलता मीनारा है। अहमदाबाद रेलवे स्टेशन से सटी मस्जिद में साढ़े छह सौ साल पुराना झूलता मीनारा अब तक पहेली बनी है। फिलहाल इन मीनारों पर पर्यटकों के लिए चढऩा मना है, लेकिन अब यह पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र है।
झूलता मीनारा, दो हिलती मीनारों का एक जोड़ा है। इनमें से एक सीदी बशीर मस्जिद के विपरीत सारंगपुर दरवाजा में स्थित है और दूसरी राज बीबी मस्जिद के विपरीत अहमदाबाद रेलवे स्टेशन के अंदर स्थित है। इस जोड़ी वाली मीनारों की खास बात यह है कि जब एक मीनार हिलती है तो थोड़ी देर बाद दूसरी मीनार भी हिलती है। सीदी बशीर मस्जिद की मीनार तीन मंजिला है जिसकी बाल्कनी में नक्काशी बनी हुई है। यह पत्थर की नक्काशी से डिजाइन की गई है।
माना जाता है कि इसे सीदी बशीर ने बनवाया गया था। इसके हिलने का मुख्य कारण आज तक नहीं पता चला और इसके पीछे इसकी बनावट का कोई गहरा रहस्य छिपा है। ब्रिटिशों ने इसका कुछ हिस्सा नष्ट कर दिया था जो अब तक ठीक नहीं किया जा सका है। इन मीनारों पर पर्यटकों का चढऩे की मंजूरी नहीं है, फिर भी यह जगह पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इतिहास के जानकारों के अनुसार मस्जिद का निर्माण 1461-64 में हुआ था। मस्जिद सीदी बशीर की देखरेख में बनी थी। उनका देहांत होने के बाद उन्हें यहां पास में ही दफनाया गया था। उनके नाम पर ही मस्जिद का नाम सीदी बशीर मस्जिद हो गया।
पिछले कई वर्षों से सीदी बशीर मस्जिद की देखरेख कर रहे शब्बीर मणियार बताते हैं कि पहले देश-विदेश से काफी पर्यटक ये मीनारा देखने आते थे, लेकिन पिछले दो दशक से यहां पर आने वाले पर्यटकों की संख्या कम हो गई है। जो पर्यटक आते थे, वे मीनार पर जाते थे और एक मीनार को हिलाते तो दूसरी मीनार हिलती थी, लेकिन पिछले डेढ़ दशक के बाद से पुरातत्व विभाग ने मीनार को पर्यटकों के लिए रोक लगा दी है।
अब पर्यटकों को संख्या बहुत ही कम है। संभवत: दिन में एक या दो पर्यटक ही यहां आते हैं। उन्होंने बताया कि एक और झुलता मीनार गोमतीपुर में भी हैं। वह भी झुलता मीनार जैसा ही है, लेकिन फिलहाल ये मीनार भी बंद कर दिया गया।
खंडहर बन रहे हैं मीनार
उधर, अहमदाबाद रेलवे स्टेशन परिसर में भी झुलती मीनार की तो जोड़ी है, लेकिन यहां फिलहाल ताला लटक रहा है। ये मीनार खंडहर बन रहे हैं। मीनार की ईंटें भी खिसकने लगी हैं। हालांकि स्टेशन से आवाजाही करने वाले पर्यटक कुछ देर के लिए यह मीनार देखने के लिए खड़े हो जाते हैं। पहले ये मीनार देखने के लिए स्टेशन परिसर से होकर जाना पड़ता था, लेकिन अब रेल प्रशासन ने लोहे की जाली का घेरा बना दिया है, जहां एक दरवाजा भी लगाया। इससे अब मीनार देखने के लिए लोग आसानी से वहां तक पहुंच सकते हैं।