
poor facilities in narega
अजमेर. सरकार भले ही महात्मा गांधी नरेगा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के दावे करे लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। ग्रामीण क्षेत्रों में जॉब कार्ड तो हजारों की संख्या में ग्राम पंचायतों में बनेें हैं लेकिन रोजगार महज चंद लोगों को ही नसीब हो रहा है। भीषण गर्मी मेें जहां काम हो रहा है वहां कार्य स्थल पर न तो छाया के लिए टेंट है और न ही पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था। दवाइयां, साबुन तथा महिला श्रमिक के छोटे बच्चों के लिए पालना की व्यवस्था तो दूर की बात है।
किसको दें काम किसको नहीं
माकड़वाली गांव में 1240 जॉब कार्ड हैं लेकिन 50 को ही रोजगार मिल पा रहा है। हाजिरी के लिए श्रमिकों में कई बार विवाद की िस्थति बन जाती है। काम कैसे करवाएं। ग्राम पंचायत में 50 जगहों पर नरेगा कार्य की मंजूरी के लिए फाइल जिला परिषद पहुंच चुकी है लेकिन अब तक स्वीकृति जारी नहीं हुई है। ग्राम पंचायत में केवल एक जगह ही काम चल रहा है।
ग्राम माकड़वाली कार्य तालाब की पाल पर खुदाई का कार्य
पत्रिका टीम ने सुबह करीब 10 बजे जायजा लिया तो सामने आया कि 50 में से केवल 40 मजदूर ही उपिस्थत है। अधिकतर बबूल की छावं में आराम व खाना खाते मिले। मोके पर काम शुरु ही नहीं हुआ। पत्रिका टीम को देखकर श्रमिकों ने तगाड़ी फावड़े उठाए और मिट्टी की खुदाई शुरु की। मेट देवराज ने बताया कि श्रमिकों की छाया के लिए टेंट है लेकिन आज महीने का अंतिम दिन होने के कारण लेकर नहीं आए। दवाइयंा कोई भी श्रमिक लेता नहीं है। पानी की व्यवस्था है।
घुघरा में मनरेगा के तहत नाड़ा निर्माण कार्य
घूघरा में नन्दा बाबा के बेरे पास नाडा निर्माण जारी था। मौके पर 77 मजदूर कार्यरत थे। इनमें 10 पुरूष् तथा 67 महिला श्रमिक थे। मेडिकल किट दो हफ्ते से नही दिया गया। मौके पर छाया के टेंट नदारद मिला। एक मजदूर पीने का पानी लेने के लिए घुघरा स्थित स्कूल के पास से 1.5 किलो मीटर दूरी से पानी ड्रम में लेकर आता है। मेट धूरा राम गुर्जर व कमलेश गुर्जर ने बताया कि पेड़ो छांव के कारण टेंट नही लगाया।
Published on:
01 May 2022 08:42 am
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