अजमेर. पुलिस महानिदेशक डॉ. भूपेन्द्रसिंह ने कहा कि पुलिस थाने पर आने वाले परिवाद को दर्ज कर अनुसंधान के आदेश से बड़ा बदलाव आया है। प्रदेश में कई थानों पर मुकदमों की संख्या में 30 से 50 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है। इससे पुलिस अनुसंधान का बोझ अधिक हो गया, लेकिन चिंता की बात नहीं है।
डीजीपी सिंह मंगलवार को अजमेर प्रवास के दौरान पुलिस लाइन में जिले के पुलिस अधिकारियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि पुलिस थाने पर आने वाली महिला व परिवादी के परिवाद पर सुनवाई कर दर्ज करने के आदेश से प्रदेश में कई थानों पर 30 से 50 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई, लेकिन न्यायालय से आने वाले इस्तगासों में कमी आई है। जो पहले थाने पर न आकर न्यायालय के जरिए बतौर परिवाद पहुंचाते थे। थाने में मुकदमे दर्ज होने से पुलिस अधिकारियों पर काम का बोझ जरूर बढ़ा है, लेकिन फिक्र की बात नहीं है। एफआईआर दर्ज करने में पुलिस में मुक्त रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था कायम हो चुकी है।
सबको संतुष्ट करना संभव नहीं
अपराध बढऩे के सवाल पर डीजीपी सिंह ने कहा कि कभी किसी को पूर्णतया संतुष्ट नहीं किया जा सकता है। हमेशा सुधार में गुंजाइश बनी रहती है। वर्तमान परिस्थितियों व मौजूदा संसाधनों को देखते जिला पुलिस अच्छा काम कर रही है। सुधार की जहां गुंजाइश है, वहां सुधार के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में मॉब लिंचिंग कानून पर डीजीपी ने कहा कि कानून अभी बना है। पूरी तरह से अमल में आना शेष है। अभी वैधानिक औपचारिकताएं बाकी है। उसके बाद अमल में लाया जा सकेगा।
पकड़ा जाएगा पपला
डीजीपी ने कहा कि कुख्यात गैंगस्टर पपला के महिमा मंडन की जरूरत नहीं है। वह भी एक गिरोह का सदस्य है। देर सवेर पकड़ा जाएगा। एक घटना हुई थी। वह इतना दुर्दान्त नहीं है।
प्राथमिकताओं पर चर्चा
डीजीपी सिंह ने क्राइम मिटिंग में अजमेर जिले के अपराध की समीक्षा करते हुए राज्य सरकार व पुलिस की प्राथमिकताओं पर पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद उन्होंने पुलिस लाइन के आवासीय क्षेत्र का निरीक्षण किया। उनके साथ आईजी संजीब कुमार नर्जरी, एसपी कुंवर राष्ट्रदीप समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।