
सोने-चांदी की कीमतों में उछाल, बढ़ते भावों में ग्राहकों के लिए सोना खरीदना होगा मुश्किल
हिमांशु धवल
अजमेर. महिलाओं का सर्वकालीन प्रिय सोना मध्यम वर्ग की पहुंच से भी बाहर हो गया है।1964 में मात्र 63.25 रुपए प्रति दस ग्राम अब 52 हजार तक पहुंच गया है। आसमानी भाव होने से पिछले साल के मुकाबले इस बार जेवराती बाजार में 80 प्रतिशत की गिरावट आंकी जा रही है।
कोरोना संक्रमण के बाद से लोगों के रोजगार धंधे छिन गए हैं। भारत में कुछ समय पहले जमीनों में निवेश को सुरक्षित माना जाता था। लेकिन अब सोने में निवेश करने और भारत-चीन विवाद सहित अन्य कारणों के चलते सोने के दाम नित नया रिकार्ड बना रहे हैं। यही स्थिति चांदी की है। सोने के महंगा होने के कारण बाजारों में खरीदारों का टोटा है। जहां पर पहले शादी में कई तोला सोना चढ़ाया जाता था, उसमें भी काफी कमी आई है। दस माह में 15 हजार रुपये का उछालसोने के भाव पिछले साल 2019 में करीब 35 हजार220 रुपए प्रति दस ग्राम थे। जबकि वर्तमान में 51 , 900 रुपए प्रति दस ग्राम तक पहुंच गए। पिछले दस माह में ही साढ़े १५ हजार से अधिक की तेजी आई है।
सोने ने ऐसे पकड़ी रफ्तार (प्रति दस ग्राम)
अजमेर सर्राफा संघ के अध्यक्ष अशोक बिंदल ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले बाजार करीब २० प्रतिशत ही रह गया है। सोने के भाव १९६४ में ६३.२५ रुपए प्रति दस ग्राम कीमत थी। इसके बाद १९७५ में ५५०, १९८० में १३३०, १९८५ में २१३०, १९९० में ३२००, १९९५ में ४६८०, २००० में ४४००, २००५ में ७०००, २०१० में १८,५००, २०१५ में २६,३४३ और २०२० में ५१,९०० रुपये का भाव है। चांदी के भाव वर्तमान में ६१,९०० रुपए प्रति किलोग्राम हैं।
डायमंड नहीं बना सका बाजार
जानकारों के अनुसार विश्वभर में डायमंड के प्रति सिर्फ २ प्रतिशत लोगों का रूझान है। इसका कारण काफी महंगा होना भी है। इसके आभूषण बनाने में ज्यादा कीमत लगती है।
Updated on:
12 Oct 2020 08:55 am
Published on:
12 Oct 2020 01:06 am
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