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अजमेर। ईरान व अमरीका एवं इजरायल के बीच युद्ध के कारण गुलाब का निर्यात लगभग बंद सा हो गया है। मांग घटने से गुलाब के भाव भी काफी गिर गए है। व्यापारी मायूस हैं तथा सीजन में उत्पादित गुलाब का स्टोरेज करने लगे हैं।
पुष्कर एवं आसपास के लगभग 2 हजार बीघा जमीन पर गुलाब की खेती की जाती है। करीब 1500 किसानों की यह मुख्य आजीविका है। चैत्र मास में वर्ष के कुल उत्पादन का पचास प्रतिशत होता है।
इसके बाद अक्टूबर व नवम्बर माह में इसकी खेती होती है। तीसरा सीजन जून व जुलाई माह में होता है। पुष्कर से प्रतिवर्ष औसतन करीब 250 टन गुलाब गल्फ व यूराेप में निर्यात किया जाता है। इनमें मुख्य रूप से दुबई, जद्दा, ईरान, ईराक, बुल्गारिया देश प्रमुख हैं।
यूरोप, जर्मन, यूके में निर्यात किया जाता है। पहले होर्मुज के रास्ते गुलाब निर्यात किया जाता था। यह मार्ग बंद होने से माल को अन्य वैकल्पिक मार्ग से ले जाने के कारण कंटेनर के भाव दोगुने हो गए हैं। यही कारण है कि निर्यात बंद हो गया है।
निर्यातकों की मानें तो युद्ध शुरू होने के बाद गल्फ देशों में गुलाब का निर्यात लगभग बंद ही हो गया है। इस सीजन में 2600 से 3000 रुपए प्रति 40 किलो यानि प्रति मण के हिसाब गुलाब बेचा जाता था।
निर्यात बंद होने से भाव घटकर 1800 रुपए प्रति 40 किलो ही रह गए है। गुलाब निर्यातक मायूस व परेशान हैं। उत्पादित गुलाब को स्टोरेज करने में लग गए हैं। गुलकंद बनाने को प्राथमिकता दे रहे हैं।
खड़ी देशों में युद्ध के कारण पुष्कर के गुलाब का निर्यात बंद सा हो गया है। मांग घटने से भाव भी गिर गए हैं।
युद्ध के कारण गुलाब का निर्यात रूक गया है। भाव भी गिर गए हैं।
Updated on:
04 Apr 2026 05:48 pm
Published on:
04 Apr 2026 05:47 pm
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