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अजमेर. देश को लोकतांत्रिक गणराज्य बने 73 (73 year Republic) साल हो गए, लेकिन राजस्थान लोक सेवा आयोग में महिलाएं सर्वोच्च पद से अब तक महरूम हैं। इस दौरान महिलाएं देश में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल जैसे अहम पद संभाल चुकी हैं। लेकिन सरकार ने आरपीएससी में कभी महिला को चेयरपर्सन नहीं बनाया है।
राज्य में वर्ष 1949 में राजस्थान लोक सेवा आयोग सेवा (rpsc ajmer) का गठन हुआ था। तत्कालीन सरकार ने डॉ. एस. के. घोष को 1 अप्रेल 1949 को इसका प्रथम अध्यक्ष नियुक्त किया। वे 27 जुलाई 1950 तक इस पद पर रहे। उनके बाद आयोग को 35 अध्यक्ष मिल चुके हैं। इनमें स्थाई और कार्यवाहक शामिल हैं।
महिला को नहीं मिली कमान
आयोग को पिछले 73 साल में कभी महिला चेयरपर्सन (rpsc chairperson)नहीं मिली है। जबकि राज्य में महिलाएं मुख्यमंत्री, विधानसभाध्यक्ष, सरकार की मुखिया, केबिनेट और राज्य मंत्री, विश्वविद्यालयों की कुलपति, कॉलेज-स्कूल की प्राचार्य और अन्य सर्वोच्च पदों पर पहुंच चुकी हैं। संभवत: भर्तियों का काम पेचीदा और समस्याओं वाला होने से सरकार ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
सदस्य तक ही सीमित
आयोग (rpsc ajmer)में महिलाओं को सिर्फ सदस्य ही बनाय गया है। कांता कथूरिया (1989 से 1995), कमला भील (1993 से 1999), डॉ. प्रकाशवती शर्मा (1996 से 2002), दिव्यासिंह (2011-12) सदस्य रहीं। मौजूदा वक्त राजकुमारी गुर्जर, डॉ. मंजू शर्मा और डॉ. संगीता आर्य सदस्य हैं।
सिर्फ पुरुषों के हाथों में कमान
एस. सी. त्रिपाठी, डी. एस. तिवारी, एम.एम. वर्मा, एल.एल. जोशी, वी. वी. नार्लिकर, आर. सी. चौधरी, बी. डी. माथुर, आर. एस. कपूर, मोहम्मद याकूब, एच. डी. गुप्ता, आर. एस. चौहान, एस. अडियप्पा, दीनदयाल, जे. एम. खान, एस. सी. सिंगारिया, यतींद्र सिंह, हनुमान प्रसाद, पी. एस. यादव, देवेंद्र सिंह, एन. के. बैरवा, जी. एस. टाक, एच. एन. मीना, सी. आर. चौधरी, एम. एल. कुमावत, प्रो. बी. एम. शर्मा, डॉ. हबीब खान गौरान, डॉ. आर.डी. सैनी, डॉ. ललित के पंवार, श्याम सुंदर शर्मा, डॉ. आर.एस. गर्ग, दीपक उप्रेती, डॉ. भूपेंद्र यादव और डॉ. शिवसिंह राठौड़
Published on:
26 Jan 2022 08:00 am
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