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LLB Course: बनाया था ये खास कोर्स, पेपर्स से नहीं निकल पाया बाहर

बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए इनमें प्रवेश का प्रावधान रखा गया। फिर भी पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम का कोई धणी-धोरी नहीं है।

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five year integrated course

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अजमेर. सरकारी और निजी कॉलेज में पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम (Integrated LLB Course) का कोई धणी-धोरी नहीं है। कागजों में अटक गया है। महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय ने कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय में एकीकृत विधि पाठ्यक्रम तैयार किया था। लेकिन यह शुरू नहीं हो पाया है।
विश्वविद्यालय के क्षेत्राधिकार में अजमेर, टोंक, भीलवाड़ा और नागौर जिले के सरकारी और निजी लॉ कॉलेज भी शामिल हैं। ज्यादातर कॉलेज में कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के पारम्परिक पाठ्यक्रम ही संचालित हैं। राज्य सहित देश के कई विश्वविद्यालयों और उनसे सम्बद्ध कॉलेज में पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम भी चलता है।

तैयार किया पांच वर्षीय पाठ्यक्रम
विवि के एकेडेमिक कौंसिल से पारित एकीकृत कोर्स में बीए, बीएससी और बी.कॉम एलएलबी शामिल किए गए। इन पाठ्यक्रमों की अवधि पांच वर्ष रखी गई। बारहवीं कक्षा उत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए इनमें प्रवेश का प्रावधान रखा गया। फिर भी पांच वर्षीय एकीकृत विधि पाठ्यक्रम (Integrated LLB Course) का कोई धणी-धोरी नहीं है।

कागजों से नहीं निकला बाहर
विश्वविद्यालय ने साल 2018 में एकीकृत पाठ्यक्रम (Integrated LLB Course) का कोई धणी-धोरी नहीं है।बनाया था। लॉ और अन्य कॉलेज में यह पाठ्यक्रम चलाना था। लॉ और अन्य सरकारी कॉलेज में पाठ्यक्रम संचालन के लिए उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजा। वहां से मंजूरी नहीं मिलने के कारण सरकारी कॉलेज में पाठ्यक्रम प्रारंभ नहीं हो पाया। निजी कॉलेज ने भी रुचि नहीं दिखाई है।

बनी लॉ यूनिवर्सिटी
2019 में डॉ.भीमराव अम्बेडकर लॉ यूनिवर्सिटी स्थापित हो चुकी है। लिहाजा सरकारी और निजी लॉ कॉलेज उससे सम्बद्ध होने शुरू हो गए हैं। ऐसी स्थिति में मदस विश्वविद्यालय का एकीकृत पांच वर्षीय विधि पाठ्यक्रम सरकारी लॉ कॉलेज में नहीं चल सकता है। निजी कॉलेजों को भी फेकल्टी और संसाधन होने पर ही पाठ्यक्रम की मंजूरी मिल सकती है।

कोर्स में भरपूर रोजगार एफएक्यू
-लीगल एडवाइजर अथवा लीगल एक्सपर्ट
-कॉरपॉरेट क्षेत्र-बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में रोजगार
-श्रम एवं नियोजन विभाग में नौकरी
-न्यायिक क्षेत्र-सरकारी अथवा निजी प्रेक्टिस

एलएलबी कोर्स में नहीं सेमेस्टर स्कीम
बार कैांसिल ऑफ इंडिया ने एलएलबी कोर्स को बेहतर बनाने, समयानुकूल नई अवधारणाओं को समावेश करने के लिहाज से सभी राज्यों को एलएलबी कोर्स में पांच वर्षीय सेमेस्टर पद्धति लागू करने के निर्देश दिए थे। फिर भी राज्य सरकार ने एलएलबी में पांच वर्षीय सेमेस्टर स्कीम लागू नहीं की है। मालूम हो कि प्रदेश में अजमेर, सिरोही, नागौर, अलवर, सीकर सहित 15 लॉ कॉलेज हैं। सभी कॉलेज में तीन साल का ही एलएलबी कोर्स संचालित है।

फैक्ट फाइल
1987 में स्थापित हुआ मदस विवि
3.50 लाख विद्यार्थियों की होती हैं परीक्षाएं
400 से ज्यादा विषय हैं संचालित
300 से ज्यादा कॉलेज सम्बद्ध