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अजब-गजब..सड़क पर हुआ ये भयानक एक्सीडेंट, कहीं खून दिखा ना घायल

क्लेम में प्रार्थी की आयु व 6000 रुपए मासिक आय के आधार पर 25 लाख 89 हजार रुपए मुआवजे की मांग की।

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road accident

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अजमेर।

दुर्घटना हुए बगैर ही मिलीभगत कर 15 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज कराने व कूट रचित दस्तावेज के जरिए 25 लाख रुपए का क्लेम पाने के मंसूबों पर पानी फिर गया। मोटर दुर्घटना क्लेम ट्रिब्यूनल के न्यायाधीश अनंत भंडारी ने मुआवजा मांगे जाने की प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया।

न्यायाधीश ने प्रकरण में लिप्त बताए गए वाहन से दुर्घटना होना साबित नहीं होने व विलंब से प्राथमिकी दर्ज कराने के आधार पर क्लेम को खारिज कर दिया।

प्रकरण के तथ्य

प्रार्थी प्रकाश चंद, ज्योत्सना, रितु सैन, कमल किशोर,चंद्रकांता निवासी बडग़ांव ने मोटर दुर्घटना वाद अधिकरण में एक क्लेम प्रस्तुत किया। इसमें मोटरसाईकिल हितेश सेन, सलीम बानो व युनाईटेड इंश्योरेंस कंपनी को पक्षकार बनाया।

क्लेम में बताया कि सरस्वती उर्फ लीला बाई मोटरसाईकिल पर बैठकर बडग़ांव से अजमेर आ रही थी जब वह माधव द्वार के सामने पहुंचे तो सामने अचानक दूसरा वाहन आ जाने से लीला बाई उछल कर सड़क पर गिर गई।

बाद में जयपुर के अस्पताल में उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। क्लेम में प्रार्थी की आयु व 6000 रुपए मासिक आय के आधार पर 25 लाख 89 हजार रुपए मुआवजे की मांग की।

बीमा कंपनी की ओर से वकील मनमीत कपूर के तर्क रहे कि कथित मोटरसाईकिल से दुर्घटना नहीं हुई। प्रार्थीगण व मोटरसाईकिल चालक आपस में रिश्तेदार हैं और दुर्भि संधि के तहतमिलीभगत कर 15 दिन बाद प्राथमिकी दर्ज कराई। वाहन दुर्घटना में लिप्त नहीं था। बयानों में भी स्पष्ट है कि दुर्घटना की सूचना पुलिस व चिकित्सक को नहीं दी। जिसमें दुर्घटना में चोट आना जाहिर किया गया हो। अदालत ने उक्त तर्कों से सहमत होते हुए अदालत ने क्लेम खारिज करने के आदेश दिए।

कई लोग उठाते हैं गलत फायदा
उपभोक्ता मंच और अन्य मंचों का कई बार लोग बेजा फायदा उठाने से नहीं चूकते हैं। दुर्घटनाओं की गलत सूचनाएं और अन्य तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है। कई बार ऐसे मामलों में क्लेम पास भी हुए हैं, लेकिन अब अदालतें भी सतर्कता बरतने लगी हैं।