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राजस्थान में ‘सोने का अंडा’ देने को तैयार मुर्गियां, पोल्ट्री उद्योग को मिली ‘संजीवनी’

राजस्थान में मुर्गियां एक बार फिर ‘सोने का अंडा’ देने को तैयार हैं। प्रदेश के करीब 2000 पोल्ट्री फार्म में 45 से 50 लाख अंडों का उत्पादन रोजाना हो रहा है। यह 6 माह में दोगुना होने का अनुमान है।

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Photo- Patrika

अजमेर. कोरोनाकाल में घाटे की मार झेल चुके पोल्ट्री उद्योग को ‘संजीवनी’ मिली है। प्रदेश में मुर्गियां एक बार फिर ‘सोने का अंडा’ देने को तैयार हैं। अंडे के दामों में तेजी से पोल्ट्री उद्योग में रौनक लौट आई है।

प्रदेश के करीब 2000 पोल्ट्री फार्म में 45 से 50 लाख अंडों का उत्पादन रोजाना हो रहा है। यह अगले 6 माह में दोगुना होने का अनुमान है।

अजमेर जिले में फिलहाल 35 से 40 लाख मुर्गियां हैं। इनसे प्रतिदिन करीब 15 लाख अंडों का उत्पादन हो रहा है। इस कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि यह संख्या जल्द ही 70 लाख तक पहुंच सकती है।

बीते दिनों अंडा 7 रुपए से अधिक में बिकने के बाद अब भाव साढ़े 5 रुपए के आस-पास आ गए हैं, लेकिन लागत के मुकाबले संतुलन बनने से यह कारोबार फिर मुनाफे का सौदा बनता नजर आ रहा है।

अजमेर शहर में 250 पोल्ट्री फार्म

अजमेर जिले में 750 से अधिक और पेराफेरी क्षेत्र में करीब 250 पोल्ट्री फार्म संचालित हैं। ब्यावर क्षेत्र में 125 से 150, किशनगढ़ व श्रीनगर में 15 से 20, केकड़ी में 35 से 40 और सरवाड़ क्षेत्र में 35 से 40 पोल्ट्री फार्म सक्रिय हैं।

दूसरे राज्यों तक पहुंच

प्रदेश में तैयार हो रहे अंडों की डिमांड दूसरे राज्यों में भी बनी हुई है। अजमेर से रोजाना बड़ी मात्रा में अंडे मध्यप्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश और बिहार भेजे जा रहे हैं। बाहर के बाजारों में स्थिर मांग के चलते पोल्ट्री व्यवसायियों को भविष्य और बेहतर होने की उम्मीद है।

चूजों की मांग

जिले में चार कंपनियों के जरिए 15 जनवरी से जून तक के लिए करीब 35 लाख चूजों की बुकिंग हुई है। ऐसे में आने वाले महीनों में नए फार्म और विस्तार की संभावनाएं हैं।

लागत बनाम मुनाफा

एक अंडे पर करीब साढ़े 4 रुपए की लागत आ रही है। इसमें 80 प्रतिशत खर्च दाने पर, जबकि शेष 20 प्रतिशत चूजों की कीमत, बिजली-पानी, मजदूरी, टीकाकरण और दवाइयों पर होता है। मौजूदा भाव के चलते लागत निकलने के साथ सीमित, लेकिन स्थिर मुनाफा भी मिल रहा है, जो कारोबार को टिकाऊ बना रहा है।

पोल्ट्री फार्म : हालात

  • 2000 : पोल्ट्री फार्म प्रदेश में
  • 45 से 50 लाख अंडों का उत्पादन रोजाना
  • 750 : पोल्ट्री फार्म अजमेर जिले में
  • 35 : लाख से अधिक मुर्गियां जिले में
  • 06 : अजमेर, जयपुर, भीलवाड़ा, झुंझुनूं, सीकर, अलवर में अधिक पोल्ट्री फॉर्म

मिली संजीवनी

कोविड संक्रमण और महंगाई के चलते पोल्ट्री व्यवसाय काफी समय से संघर्ष कर रहा था। इस दौरान कई पोल्ट्री फार्म बंद भी हो गए। इस बार अच्छी बरसात के चलते दाना सस्ता रहा और अंडे की रेट भी अच्छी रहा। इससे पोल्ट्री व्यावसायियों को ‘संजीवनी’ मिली है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि कई बंद पड़े पोल्ट्री फार्म फिर शुरू होंगे।

  • मो. सलीम, उपाध्यक्ष, राजस्थान पोल्ट्री फैडरेशन

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