
पटरी पार कर जाने से बाज नहीं आ रहे लोग, कैसे रुकेंगे हादसे!
अजमेर. रेल विभाग मुसाफिरों की सुविधाओं के लिए हर संभव प्रयास करता है। इसमें रेलवे स्टेशन से लेकर ट्रेन की सुविधाएं शामिल है,लेकिन आमजन अपनी जिम्मेदारी के प्रति जागरूक नहीं है। अजमेर जिले में कई जगह अंडरपास व ओवरफुट ब्रिज की कमी है।
इसके चलते पटरी पार कर गंतव्य जान े की हर किसी को जल्दी रहती है। इसके चलते हादसे थम नहीं रहे। कई जगह फाटक बंद होने के बाद भी लोग दूसरे छोर जाने की कोशिशें करते रहते है। किशनगढ़ में रेल पटरियों पर हादसे होते रहे हैं। बीते वर्ष पटरियों पर कई अकाल मौतें हो चुकी है।
वर्ष 2020 की शुरुआत में हुई किशोर की मौत ने जिम्मेदारों और नागरिकों दोनों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। मार्बल नगरी की आबादी का बड़ा हिस्सा रेलवे और डीएफसीसी की लाइन के पार निवास कर रहा है। लाइन के पार नगर परिषद के करीब 10 से ज्यादा वार्ड हैं। इनमें करीब 40 से 45 हजार लोग रहते हैं। यह लोग रोजाना किसी ना किसी काम से लाइन पार करते हैं।
रेलवे की ओर से फरासिया, नया रेलवे स्टेशन, कृष्णापुरी, सांवतसर, मदनेश गौशाला में आरयूबी बनाए गए हैं। वहीं मालियों की ढाणी के पास एक अण्डरपास है। इनमें से कृष्णापुरी आरयूबी और रूपनगढ़ आरओबी के बीच में सबसे घनी आबादी निवास कर रही है। सबसे ज्यादा हादसे भी इन दोनों के बीच में ही होते हैं। सबसे ज्यादा हादसे भी यहीं होते हैं। लोग अंडर ब्रिज, अंडरपास और आरयूबी से जाने की बजाय सीधे निकलने की कोशिश करते हैं।
यह स्थित है कॉलोनियां
रेल लाइन के पार मालियों की ढाणी, दाधीच कॉलोनी, बृजविहार, नाथी का जाव, रूपनगढ़ रोड, हमीर कॉलोनी सहित कई घने आवासीय क्षेत्र है।
इसलिए होते हैं हादसे
रेलवे लाइन के पार रहने वाले लोगों में से कई लोगों को काम-धंधे की वजह से लाइन पार जाना पड़ता है। उधर, लोग खरीददारी करने के लिए भी लाइन के दूसरी ओर आते है,क्योंकि सब्जीमंडी, ओसवाली मौहल्ला, मुख्य चौराहा सहित शहर के प्रमुख बाजार इसी क्षेत्र में हैं।
क्षेत्र बड़ा होने के कारण लोगों को ओवरब्रिज, अंडरपास और आरयूबी दूर लगते है। वे सीधे ही लाइन पार करते हैं। पैदल जाने वाले लोग अंडरपास में से निकलने से कतराते हंै। सीधे पटरियों से होकर ही जाते हैं। इस दौरान वे कई बार हादसे का शिकार हो जाते हैं।
बरसात में हालात खराब
बरसात के समय आरयूबी और अंडरपास सभी जगह पानी भर जाता है। ऐसे में यहां से निकलना दूभर हो जाता है। अंडरपास इतना छोटा है कि वहां से दोपहिया वाहन ही निकल सकते हैं। वह भी एक बार में एक तरफ जाने वाले वाहन।
वर्ष 2019 में कई मौतें
हादसों पर नजर डालें तो वर्ष 2019 में रेलवे लाइन पर लगातार मौते होती रही। इनमें से कई मालियों की ढाणी क्षेत्र में हुई। वर्ष 2020 के पहले दिन ही एक किशोर ललित कुमार की मौत हो गई। जबकि उसका भाई घायल है।
समझाइश और कार्रवाई दोनों
रेलवे ट्रेक को अनाधिकृत रूप से पार वालो पर आरपीएफ की ओर से कार्रवाई और समझाइश दोनों तरीके अपनाए जाते हैं। 2019 में सौ से ज्यादा लोगों पर कार्रवाई भी हुई। समझाइश भी जारी रही।
Published on:
02 Jan 2020 11:39 pm
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