
ada
भूपेन्द्र सिंह
अजमेर.अजमेर विकास प्राधिकरण ada का ऑनलाइन online work काम व सिस्टम की पिछले कई सालों से न तो ऑडिट हुई और ना ही इसे जांचा गया। प्राधिकरण का आईटी इंफ्रास्टक्चर बदहाल है। सॉफ्टवेयर पुराने ढर्रे के हैं। प्राधिकरण ने कंपनी को लाखों रुपए का सर्वर और हार्डवेयर दे रखा है। तीन में से दो सर्वर बंद पड़े र्हं। एक डेस्कटॉप लगाकर जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है। फिर भी मेंटीनेंस पर लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। कंपनी के सॉफ्टवेयर भी अपग्रेड नहीं हुए। नए सिस्टम पर भी पुरानी विंडो डालकर अपने काम को छुपाने में लगी कंपनी की करतूत अब खुलने लगी है। कंपनी जो सॉफ्टवेयर काम में ले रही है उसकी प्रामाणिकता को भी नहीं परखा गया। उदयपुर की कंपनी को थर्ड पार्टी से जांच करवाकर नई कंपनी को सॉफ्टवेयर डेटा और जांच रिपोर्ट देनी थी लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। इसे लेकर दोनों कम्पनी के बीच पिछले 5 दिनों से घमासान चल रहा है।
48 लाख के बजाय 8.70 लाख में होगा काम
एडीए ने अपनेआईटी काम का ठेका हाल ही जयपुर jaipurकी एक कम्पनी को महज 8.70 लाख रुपए में दिया है। जबकि 10 साल से इसी काम पर एडीए प्रति दो वर्ष 48 लाख रुपए लुटा रहा था। पुरानी कम्पनी कंपनी का कार्यादेश समाप्त हो चुका है। इसलिए अब कंपनी जिम्मेदारी न लेकर पल्ला झाडऩे में लगी हुई है। कंपनी ने थर्डपार्टी ऑडिट और जांच रिपोर्ट पर चुप्पी साध रखी है।
एडीए हुआ सख्त, जारी किए आदेश
पूर्व कमिश्नर तथा वर्तमान सचिव ने कुछ दिन पूर्व ही ऑनलाइन काम की थर्डपार्टी ऑडिट करवाने के निर्देश पुरानी कम्पनी को दिए थे,लेकिन कम्पनी ऑडिट नहीं करा रही। अब एडीए सचिव ने नई कंपनी को थर्ड पार्टी अर्जेंट ऑडिट टेस्टिंग के लिए आदेश दिए हैं। ऑडिट में उदयपुर की कंपनी के प्रतिनिधि को उपस्थित होना है लेकिन इसके बावजूद अब तक थर्ड पार्टी ऑडिट नहीं हो सकी।
सर्वर ही बंद, किसका करें मेंटीनेंस
नए टेंडर के तहत 1 मई से जयुपर की कम्पनी को एडीए का आईटी का काम संभालना है। नई कंपनी का कहना है कि पुरानी कम्पनी द्वारा उसे कार्यभार सही तरीके से नहीं सौंपा जा रहा है ना ही कोई जांच कराई गई है। एडीए के तीन में से एक सर्वर चालू ही नहीं हुआ और एक बंद पड़ा है तो मेंटीनेंस किसका करें। इसमें जो सॉफ्टवेयर काम में लिए जा रहे वह ओरिजनल है या नहीं, इसकी भी उदयपुर udaipur की कंपनी जांच नहीं करवा रही।
एडीए में आईटी इंजीनियर नहीं
एडीए में आईटी विशेषज्ञ नहीं होने का कम्पनी ने जमकर फायदा उठाया। कंपनी क्या काम कर रही थी इसकी जांच आज तक नहीं की जा सकी। कम्पनी के खिलाफ नीलामी में गड़बडिय़ों की शिकायत की भी जांच चल रही है। महज 148 लोगों के नीलामी प्रक्रिया में भाग लेते ही कंपनी का सरवर क्रैश हो गया था। पूर्व में कम्पनी पर 4.50 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है।
इनका कहना है
पुरानी कम्पनी को थर्डपार्टी ऑडिट के निर्देश दिए गए थे उसने ऑडिट नहीं करवाई है। अब नई कम्पनी को निर्देशित किया गया है कि वह काम शुरू करे और पुरानी कम्पनी के प्रतिनिधि के साथ ऑडिट करवा कर रिपोर्ट दे। ऑडिट खर्च व कोई भी गड़बड़ी पाए जाने पर पुरानी कम्पनी जिम्मेदार होगी।
किशोर कुमार
सचिव, अजमेर विकास प्राधिकरण
Published on:
6 May 2021, 5:27 PM IST
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