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अब यहां भी नहीं बच पाएंगे आप, आंखों की बी-स्कैन सोनोग्राफी मशीन पर रहेगी ‘नजर

आंखों की सोनोग्राफी करने वाली बी स्कैन मशीन पर भी अब कड़ी नजर रखी जाएगी।

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administration will watch B scan machine in hospitals

अब यहां भी नहीं बच पाएंगे आप, आंखों की बी-स्कैन सोनोग्राफी मशीन पर रहेगी 'नजर

अजमेर. आंखों की सोनोग्राफी करने वाली बी स्कैन मशीन पर भी अब कड़ी नजर रखी जाएगी। कन्या भ्रूण हत्या रोकने एवं ***** परीक्षण पर लगाम कसने के लिए बी स्कैन मशीनों को भी पंजीकृत किया जाएगा। इन पर भी जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा। वहीं इकोकार्डियोलॉजी व यूरोलॉजी विभाग में भी मशीन को पंजीकृत किया जाएगा।

प्रदेशभर में नेत्र रोग के सरकारी एवं निजी अस्पतालों में काम आने वाली बी स्कैन मशीन के माध्यम से आंख की सोनोग्राफी की जाती है। इस मशीन को पीसीपीएनडीटी एक्ट 1994 के दायरे में शामिल कर लिया गया है। जल्द सरकारी एवं निजी अस्पतालों में बी स्कैन मशीन सहित अन्य दो विभागों की मशीनों को भी एक्ट के तहत पंजीकृत किया जाएगा। इनके उपयोग का रिकॉर्ड भी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन निदेशक के अनुसार सेन्ट्रल सुपरवाइजरी बोर्ड (सीएसबी) की बैठक में निर्णय किया जा चुका है। अजमेर जिला मुख्यालय में जेएलएन चिकित्सालय सहित करीब 4 जगह बी स्कैन मशीन हैं, जबकि जिलेभर में करीब 7 से 8 मशीनें हैं।

रेडियोलॉजी विभाग पर रहना होगा निर्भर

अब तक बी-स्कीन मशीन से नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक भी आंख की सोनोग्राफी कर मरीज का इलाज शुरू कर देते थे मगर पीसीएनडीटी एक्ट में शामिल करने से इस काम से चिकित्सक बचेंगे। इसके लिए रेजियोलॉजी विभाग के रेडियोलॉजिस्ट पर निर्भर रहना पड़ेगा। यही स्थिति यूरोलॉजी विभाग में होगी।

नहीं ली गई राय

बी स्कैन मशीन का भू्रण का ***** परीक्षण में उपयोग 99 प्रतिशत तक नहीं किया जाता है। इसके बावजूद सेन्ट्रल सुपरवाइजरी बोर्ड की ओर से ऑल इंडिया ऑफ्थोलमोलॉजी सोसायटी की राय के बगैर इसे लागू किया जा रहा है। नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों की मानें तो यह निर्णय मरीजों के हित में नहीं है।

प्रदेशभर में ऑफ्थोलमोलॉजी विभाग में बी स्कैन मशीन, सहित इको कार्डियोलॉजी व यूरोलॉजी विभाग में भी संबंधित स्कैन (सोनोग्राफी) मशीन को पीसीपीएनडीटी के दायरे में शामिल कर पंजीकृत किया जाएगा।

-ओमप्रकाश टेपण, जिला समन्वयक पीसीपीएनडीटी