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Ajmer- उर्स में बिक गई 2 लाख किलो मिठाई, सोहन हलवे की बड़ी डिमांड

सोहन हलवे की बड़ी डिमांड, सोन पपड़ी व कराची हलवे की भी रहती है मांग

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अजमेर

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Amit Kakra

Jan 30, 2023

Ajmer- उर्स में बिक गई 2 लाख किलो मिठाई, सोहन हलवे की बड़ी डिमांड

Ajmer- उर्स में बिक गई 2 लाख किलो मिठाई, सोहन हलवे की बड़ी डिमांड

अजमेर. ख्वाजा साहब का सालाना उर्स जहां इबादत के लिए लाखों अकीदतमंदों को अजमेर खींच लाता है, वहीं बाहर से आने वाले जायरीन यहां की प्रसिद्ध मिठाई को भी बतौर नजराना अपने साथ ले जाना नहीं भूलते। उर्स के दौरान अजमेर का सोहन हलवा जमकर बिकता है।

अजमेर आने वाले जायरीन यहां के सोहन हलवे, सोन पपड़ी और कराची हलवे के मुरीद हैं। इनकी खासियत कई दिनों तक खराब नहीं होना भी है। जिसके चलते यह अजमेर आने वालों की पसंद बनी रहती हैं। एक मोटे अनुमान के मुताबिक उर्स के दौरान अजमेर में करीब 2 लाख किलो मिठाई की बिक्री होना बताया जा रहा है। उर्स में करीब तीन से चार लाख जायरीन आते हैं। जायरीन ख्वाजा साहब की जियारत के बाद तबर्रुक के रूप में सोहन हलवा ले जाते हैं। मेला क्षेत्र में इन दिनों हर कहीं सोहन हलवा देखा जा सकता है। स्थापित दुकानों के अलावा लोग काउंटर लगाकर सोहन हलवा बेचते हैं। इसकी सर्वाधिक बिक्री छठी के दिन होती है।

150 से 750 रुपए किलो तक का भाव

मेला क्षेत्र में वनस्पति घी का सोहन हलवा 180 रुपए प्रतिकिलो की दर से बिक रहा है। जबकि देसी घी का सोहन हलवा छह सौ रुपए प्रति किलो से शुरू है। सोहन हलवे में ड्रायफ्रूट की मात्रा और घी की वैरायटी के हिसाब से इसकी कीमत बढ़ती जाती है। इस सीजन में यह करीब 750 रुपए प्रति किलो तक बेचा जा रहा है।

सोन पपड़ी की बढ़ी खपत

जायरीन सोहन हलवे के साथ ही सोन पपड़ी के भी मुरीद हैं। दरगाह क्षेत्र में 150 से 450 रुपए प्रति किलो के भाव में सोन पपड़ी मिल जाती है।

कराची हलवे की भी डिमांड

उर्स के दौरान कराची हलवे की भी खूब बिक्री होती है। हालांकि सोहन हलवे और सोन पपड़ी के मुकाबले यह कम बिकता है। इसकी रेन्ज 120 से 500 रुपए प्रतिकिलो है।

यह है कारण

सोहन हलवा, कराची हलवा और सोन पपड़ी की खासियत कई दिनों तक खराब नहीं होना है। साथ ही इनके हर पीस की पैकिंग अलग-अलग होती है। इससे लोगों में इन मिठाइयों की खपत ज्यादा है। हालांकि अलवर का मिल्क केक और सिका हुआ मावा, मखाने भी खूब बिकते हैं।

मिलता है रोजगार

उर्स के दौरान मिठाई के व्यापारी दुकानों पर स्टाफ बढ़ा देते हैं। अतिरिक्त कारीगर लगाते हैं। इससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलता हैं। वहीं कई लोग उर्स के दौरान ही छोटे काउन्टर लगाकर व्यापार करते हैं।

इनका कहना है. . .

हर धार्मिक नगरी का कोई खाना फेमस होता है। उसकी लोगों में मांग रहती है। उर्स में सोहन हलवे, सोन पपड़ी और अन्य मिठाईयों की मांग रहती है। यह व्यापार कुछ दिनों का ही है। इससे रोजगार भी मिलता है।

कुतुबुद्दीन सकी, खादिम

ख्वाजा साहब के दर से लोग खाली हाथ नहीं जाते हैं। सोहन हलवा, सोन पपड़ी, कराची हलवा लोग ज्यादा पसंद करते हैं। मिल्क केक भी ले जाते हैं। इसकी रेन्ज भी काफी बड़ी है।

विमल गर्ग, व्यापारी

दुकानें- 900

मिठाईयां- 2 लाख किलो

औसत- कीमत 250 रुपए