
Ajmer Dargah urs : 15 दिन के लिए 1.85 करोड़ में देग का ठेका
Ajmer Dargah urs : ख्वाजा साहब की दरगाह में रखी दोनों देगों का ठेका उर्स अवधि (15 दिन) के लिए 1 करोड़ 85 लाख रुपए में छोड़ा गया है। यह ठेका पिछले साल की तुलना में 22 लाख रुपए कम में छोड़ा गया है।
अंजुमन के सह सचिव सैयद मुसब्बीर चिश्ती ने बताया कि इस बार ठेका उर्स के 15 दिन के लिए ही छोड़ा गया है। कोविड को देखते हुए इस बार भी पुष्कर मेले के 10 दिन शामिल नहीं किए गए हैं। गौरतलब है कि उर्स का ठेका 25 दिन के लिए छोड़ा जाता है। उर्स के 15 दिन के साथ ही पुष्कर मेले के 10 दिन का ठेका भी अभी से ही छोड़ दिया जाता है। लेकिन पिछले दो साल से पुष्कर मेले के 10 दिन शामिल नहीं किए गए हैं।
पिछले साल की तुलना में कम में ठेका छोड़े जाने का प्रमुख कारण कोरोना संक्रमण को माना गया है। इस बार ठेका खादिम सैयद अनश अली ने लिया है। पिछले उर्स में देग का ठेका 2 करोड़ 7 लाख 7 हजार ***** रुपए में छोड़ा गया था।
2 को खुलेगा जन्नती दरवाजा
ख्वाजा साहब का उर्स विधिवत रूप से रजब का चांद दिखाई देने पर 2 या 3 फरवरी से शुरू होगा। हालांकि दरगाह स्थित जन्नती दरवाजा 2 फरवरी को ही खोल दिया जाएगा। उर्स के दौरान 6 दिन तक यह दरवाजा खुला रहता है।
दरगाह में बदला खिदमत का समय
ख्वाजा साहब की दरगाह में खिदमत का समय अब बदल गया है। दरगाह में रोजाना दोपहर 3 बजे होने वाली खिदमत अब रात आठ बजे होगी। अंजुमन सचिव वाहिद हुसैन अंगारा शाह ने बताया कि चांद रात तक खिदमत रात आठ बजे होगी।
शान-ओ-शौकत से चढ़ा उर्स का झंडा
सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में शनिवार को शान-ओ-शौकत से उर्स का झंडा चढ़ाया गया। इसके साथ ही गरीब नवाज के 810वें उर्स की औपचारिक शुरुआत हो गई। झंडे की रस्म में शामिल होने के लिए हजारों जायरीन उमड़े। इस दौरान चारों तरफ सूफियाना कलाम गूंजते रहे। रह-रह कर तोप की आवाजें आती रहीं। अकीदतमंद में झंडे को चूमने की होड़ मची रही।
गूंजे सूफियाना कलाम
बैंड बाजे की स्वर लहरियों और सूफियाना कलाम के बीच झंडे का जुलूस शाम को असर की नमाज के बाद दरगाह के पास स्थित गरीब नवाज गेस्ट हाउस से रवाना हुआ। शाही चौकी के कव्वाल 'भर दो झोली मेरी..., दमादम मस्त कलंदर...सरकार की चादर, सरकार के दर पर...Ó जैसे सूफियाना कलाम पेश करते हुए चल रहे थे। वहीं भीलवाड़ा से झंडा लेकर आए लाल मोहम्मद गौरी परिवार के सदस्यों के सिर पर फूलों की टोकरी थीं। जुलूस जिधर से भी गुजरा वहां लोग झंडे को चूमने के लिए बेताब नजर आए।
...और मच गई होड़
झंडे का जुलूस लंगरखाना गली, दरगाह बाजार होते हुए दरगाह के मुख्य द्वार निजाम गेट तक पहुंचा। वहां से दरगाह में प्रवेश करते ही परिसर में खड़े लोगों में झंडा चूमने की होड़ सी मच गई। जैसे-तैसे कर झंडे का बुलंद दरवाजे पर पहुंचाया गया। जहां फखरुद्दीन गौरी ने सैयद मारूफ अहमद नबीरा मुतवल्ली सैयद असरार अहमद की सदारत में झंडा पेश किया। जुलूस के दौरान बड़े पीर की पहाड़ी से 25 तोपों की सलामी दी गई।
नहीं हो सकी कोरोना गाइड लाइन की पालना
दरगाह परिसर में झंडा चूमने के लिए जबरदस्त होड़ मची। स्थिति यह हो गई कि धक्का-मुक्की के आलम के बीच झंडा बुलंद दरवाजे पर पहुंचाया गया। इस दौरान न तो सोशल डिस्टेंस नजर आया और न ही चेहरे पर मास्क। रस्म के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बड़ी संख्या में पुलिस जाप्ता तैनात किया गया। लेकिन जुलूस के दरगाह में प्रवेश करते ही वहां खड़े लोगों में झंडा चूमने के लिए जबरदस्त होड़ मची। इसी दौरान बुलंद दरवाजे और महिला कॉरिडोर से उछाले गए पैसों को लूटने की भी होड़ मची। बाद में पुलिस ने हालात पर काबू पा लिया।
गलियों और छतों पर नजर आए जायरीन
झंडे की रस्म के दौरान दरगाह में वजूखाना आदि की छतों पर जायरीन चढ़े नजर आए। वहीं बाहर फूल गली, लंगरखाना, नला बाजार की तरफ कुछ देर जायरीन को रोका गया। लेकिन यहां भी दरगाह परिसर की तरह लोग एक-दूसरे से सट कर ही खड़े थे। ऐसे में कोरोना गाइड लाइन की कहीं भी पालना नजर नहीं आई। यहां तक कि कई पुलिसकर्मियों के चेहरे से भी मास्क हटा हुआ था।
Published on:
30 Jan 2022 02:08 pm
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