
Ajmer 34 लाख की आबादी को सप्लाई, पेयजल जांच के लिए मात्र एक लैब
अजमेर. जिले की लाखों की आबादी पेयजल जांच के लिए एक ही लैब पर निर्भर है। जिले से सभी उपखण्डों में होने वाले पेयजल की जांच का भार जिला मुख्यालय स्थित एक मात्र लैब पर है। अजमेर शहर की आठ लाख की जनता भी जांच के लिए एक लैब पर निर्भर है।जलदाय विभाग की ओर से आमजन को की जाने वाली जलापूर्ति की जांच जरूरी है। जिले की आबादी करीब 34 लाख है। आए दिन दूषित पेयजल सप्लाई की शिकायतों के बावजूद पानी के नमूनों की जांच कम हो रही है। पेयजल के नमूनों की जांच का प्रावधान भी आमजन को पता नहीं है।
नमूनों की जांच का प्रावधान
जलदाय विभाग के अभियंता फील्ड में जाकर पेयजल के नमूने लेते हैं। इन नमूनों की जांच अजमेर में जिला स्तरीय लैब में होती है। जांच लैब की ओर से भी विभिन्न स्थानों पर नमूने लिए जाते हैं। विभाग की सरकारी लैब में पानी में क्लोरीन अवशेष जांच के लिए केमिकल जांच होती है। जांच मानकों पर खरे नहीं उतरे तो नमूनों की बेक्टोलॉजिकल जीवाणु परीक्षण कराया जाता है। आम व्यक्ति भी निर्धारित शुल्क पर पेयजल नमूने की जांच करवा सकते हैं।
लीकेज के कारण अशुद्धता
वैज्ञानिक अर्चना माथुर के अनुसार बीसलपुर के पानी की क्वालिटी काफी अच्छी है। पानी में अशुद्धता लीकेज के कारण होती है। यह लीकेज उपभोक्ता की लाइन में भी हो सकता है।
नाम मात्र के नमूने फेल
उधर शहर में भले ही आए दिन गंदे पानी की शिकायतें आती रही हों, लेकिन लैब में हुई जांच में नाम मात्र के नूमने ही फेल हुए हैं। घरों में सप्लाई किए जाने वाले पानी को लेकर बीते छह माह में 496 नमूनों का जीवाणु परीक्षण किया गया। इनमें से 7 नमूने ही फेल हुए। वहीं 818 सेम्पल में क्लोरीन की जांच की गई। इनमें से 4 नमूने ही फेल हुए।
मोबाइल लैब भी
जिला स्तर पर एक लैब है। मोबाइल लैब भी है। इससे भी जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर नमूने लिए जाते हैं। फील्ड में भी अभियंता नमूने देते हैं।
- अर्चना माथुर, अधीक्षण रसायनज्ञ, जलदाय विभाग प्रयोगशाला
Published on:
09 Jun 2023 12:06 pm
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