
medicinal plants in ajmer
रक्तिम तिवारी/अजमेर.
आयुर्वेद औषधियों और वनस्पति का सदियों से हमारे जीवन में महत्व रहा है। चरक, सुश्रुत जैसे ऋषि-मुनियों ने आयुर्वेद की महत्ता से दुनिया को रूबरू कराया था। लेकिन हम नाग पहाड़ और मैदानी इलाकों में बिखरे कई नायाब पौधों से ही अन्जान हैं। इनमें कई औषधीय महत्ता से जुड़े हैं। ना तो इनपौधों का अधिकृत आंकड़ा है, ना शैक्षिक संस्थाएं शोध कर रही हैं।
शास्त्री नगर, कोटड़ा, सराधना, तारागढ़, आदर्श नगर, नाग पहाड़, नौसर, घूघरा घाटी, बीर, दांता, जतिया, सरवाड़, किशनगढ़, नूरियावास और ब्यावर के के विभिन्न हिस्सों के वन क्षेत्र में काफी औषधीय महत्व के पौधे मौजूद हैं। इनमें खरणी, कुमठा, अमलताश, आंवला, तुलसी, बेल, देसी बबूल, खैर, एरूंज, धोकड़ा, जूली फ्लोरा, नीम, खेजड़ी चुरैल, करंज, कचनार और अन्य शामिल हैं। झाड़ी वाले प्रजातियों में डासण, गागण, बेर, पियागण, खरेणा,वज्रदंती, थोर, गुल ए बनफशा शामिल हैं।
यह हैं औषधीय महत्व के पौधे
वज्रदंती, बेर, खरेणा, गुल ए बनफशा तो औषधीय महत्व के पौधे हैं। इनका आयुर्वेदिक और यूनानी दवा बनाने में इस्तेमाल होता है। इसी तरह बहते खून रोकने का पौधा रक्त स्तम्भनी (काला भांगरा) अजमेर में कायड़, घूघरा, माकड़वाली सहित नाग पहाड़ पर बहुतायत में दिखता है।
आमजन नहीं जानते महत्व
सामान्यत: आमजन औषधीय पौधों की पहचान और उनका महत्व नहीं जानते हैं। जबकि नाग पहाड़ और इनसे सटे इलाकों में इन पौधों की कई जगह मौजूदगी है। वज्रदंती का अधिकांशत: उपयोग टूथपेस्ट बनाने में होता है। बापची नामक पौधा दिमाग को ठंडा रखने में उपयोग में लिया जाता है। इसके फल को रातभर पानी में भिगोने के बाद सुबह दूध के साथ प्रयोग में लिया जाता है। गुल ए बनफशा का उपयोग भी स्वाथ्य के लिए किया जाता है।
कराई थी पौधों की गणना
वन विभाग प्रतिवर्ष वैशाख पूर्णिमा पर वन्य जीवों की सालाना गणना कराता है। यह गणना 24 घंटे तक की होती है। साल 2007-08 में केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की टीम ने वन्य जीव की गणना के दौरान औषधीय के महत्व के पौधों की गणना कराई थी। वनकर्मियों को वज्रदंती, गूगल, गुल ए बनफशा जैसी दुर्लभ औषधीय पौधों के भंडार मिले थे। इसकी जानकारी वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजी गई थी।
काजरी और मेडिसनल बोर्ड के पास जिम्मा
वन विभाग की मानें तो नाग पहाड़ अथवा जिले के वन्य और क्षेत्र में कई औषधीय पौधे और वनस्पति मौजूद है। लेकिन इनकी गणना का कार्य राजस्थान स्टेट मेडिसनल प्लांट बोर्ड जयपुर और केंद्रीय शुष्क क्षेत्र अनुसंधान केंद्र जोधपुर करते हैं। इनकी टीम साल में एक या दो बार आकर सर्वेक्षण करती है। वन विभाग ने करीब 12 वर्ष पूर्व मुख्यालय के आदेश पर कुछेक औषधीय पौधों को चिन्हित कर रिपोर्ट भेजी थी।
पुष्कर में बनाया है हर्बल गार्डन
वन विभाग ने पुष्कर में हर्बल गार्डन जरूरी तैयार किया है। इसमें आंवला, बेल, तुलसी सहित औषधीय महत्व के कई पौधे और वनस्पतियां तैयार की जा रही हैं। इनके विक्रय के लिए समिति भी बनाई गई है।
कई प्रजातियां हुई लुप्त
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय के पूर्व पर्यावरण विभागाध्यक्ष प्रो. के. सी. शर्मा ने निर्देशन में एक शोधार्थी ने 2003-04 में पूर्व नाग पहाड़ और इसके आसपास के इलाकों में औषधीय महत्व के पौधों और वनस्पति पर शोध किया था। शोध सर्वेक्षण में करीब 2 हजार औषधीय और वनस्पतियों को रेड जोन (विलुप्त या खतरा) में शामिल किया गया था।
Published on:
29 Apr 2021 08:34 am
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