
हाइटेक एप बताएगा अजमेर दरगाह के स्टाफ की लोकेशन
रक्तिम तिवारी
ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती की दरगाह की देखरेख करने वाली कमेटी अब आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तकनीक का इस्तेमाल करेगी। कर्मचारियों की ड्यूटी लोकेशन जानने के लिए मोबाइल एप का इस्तेमाल किया जाएगा। कमेटी ने आईटी कंपनी से मोबाइल एप खरीदा है।केंद्र सरकार के 1955 के दरगाह एक्ट के अनुसार कमेटी का गठन किया गया है। इसमें अध्यक्ष-सदस्यों के अलावा विभिन्न कर्मचारी कार्यरत हैं। यह दरगाह की संपत्तियों की देखरेख, दरगाह परिसर में स्वच्छता, सुरक्षा, लेखा और अन्य कामकाज करते हैं। सूचना प्रौद्योगिकी के दौर में कमेटी ने कामकाज को स्मार्ट बनाने का फैसला किया है।
कमेटी ने खरीदा एपअल्पसंख्यक मामलात मंत्रालय के निर्देश पर दरगाह कमेटी ने निजी आईटी कंपनी से स्मार्ट एप खरीदा है। यह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस-जीपीएस तकनीक पर कामकाज करेगा। इसके तहत कमेटी के कर्मचारियों को अपना पंजीयन कराना होगा। साथ ही मोबाइल पर एप डाउनलोड करना होगा।
यूं होगा इस्तेमाल
- जान सकेंगे कर्मचारियों की ड्यूटी लोकेशन
- ऑनलाइन बदल सकेंगे कार्मिक की ड्यूटी
- कहीं अव्यवस्था होने पर मोबाइल पर मैसेज से निर्देश
- किसी कार्मिक के अवकाश की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था
- लैपटॉप अथवा मोबाइल पर रखेगी दरगाह की लोकेशन
- प्रत्येक कार्मिक का होगा अपना पासवर्ड
- अवकाश प्रार्थना पत्र भी दे सकेंगे ऑनलाइन
पेपरलैस वर्क की तरफ कदम
केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया अभियान के तहत दरगाह कमेटी धीरे-धीरे पेपरलैस वर्क की तरफ कदम बढ़ा रही है। ईआरपी सिस्टम के तहत ई-फाइल सिस्टम तैयार किया जा रहा है। दरगाह से जुड़ी सभी पत्रावलियां-दस्तावेज ऑनलाइन होंगे। कर्मचारी कंप्यूटर स्क्रीन पर कामकाज करेंगे। इसके तहत ई-पेमेंट, ई-भुगतान और अन्य सुविधाएं भी शामिल होंगी।
फैक्ट फाइल
1995 के दरगाह एक्ट के तहत बनी है कमेटी
200 से ज्यादा कर्मचारी हैं कार्यरत100 करोड़ से ज्यादा का बजट
50 से ज्यादा संपत्तियों की देखरेख
कमेटी धीरे-धीरे स्मार्ट वर्किंग की तरफ बढ़ रही है। आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस से दरगाह कमेटी स्टाफ की ड्यूटी लोकेशन और वर्किंग जान सकेंगे। ईआरपी सिस्टम भी जल्द शुरू होगा।
शादान जेब खान, नाजिम, दरगाह कमेटी
Published on:
15 Nov 2022 06:40 pm
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