अजमेर. जिले में पेयजल की स्थिति अच्छी नहीं है। एक तरफ जलापूर्ति के एक मात्र स्त्रोत यानि बीसलपुर बांध में पर्याप्त पानी नहीं है। दूसरी ओर अंधाधुंध जलदोहन से पूरा जिला डार्क जोन में है। यही स्थिति रही तो आने वाले दो-तीन साल में हालात बेहद खराब हो जाएंगे।
सरकार जलदोहन रोकने और पेयजल इंतजाम को लेकर गंभीर नहीं दिख रही है। मौजूदा वक्त बीसलपुर बांध परियोजना अजमेर जिले की लाइफ लाइन है। इसमें अजमेर सहित भीलवाड़ा-चित्तौडगढ़़ जिले में होने वाली बरसात का पानी पहुंचता है। शहरी क्षेत्र के अंतर्गत अजमेर, ब्यावर, किशनगढ़, नसीराबाद, केकड़ी, सरवाड़, बिजयनगर और पुष्कर में पेयजल की सप्लाई की जाती है। इसके तहत शहरी इलाके में वर्तमान में 12 लाख लोगों के लिए सप्लाई की जा रही है। वहीं ग्रामीण क्षेत्र में 18 लाख लोगों के लिए पानी की सप्लाई की जा रही है।
बीसलपुर बांध में अजमेर जिले के लिए मांग वर्ष 2021 तक 5 टीएमसी है। डार्क जोन में पूरा जिला अंधाधुंध जल दोहन से समूचा अजमेर जिला डार्क जोन में है। भूजल विभाग प्रतिवर्ष मानूसन पूर्व और मानसून समाप्ति के बाद भूजल स्तर मापन करता है। इसके लिए जिले की नौ पंचायत समितियों में 350 कुएं चिह्नित हैं। भूजल स्तर की जिले की रिपोर्ट गंभीर है। जिले में बोरिंग की अनुमति जिला कलक्टर देते हैं। लेकिन अवैध रूप से जिले में बोरिंग जारी है।
वर्तमान में यूं हो रही है सप्लाई बीसलपुर बांध से अजमेर, ब्यावर और किशनगढ़ में 155 लीटर, नसीराबाद, केकड़ी, सरवाड़ व पुष्कर में 135 लीटर और ग्रामीण क्षेत्र में 40 लीटर प्रति व्यक्ति मांग के अनुसार पानी की सप्लाई की जा रही है। 2021 की अनुमानित जनसंख्या के करीब विभाग की ओर से भेजे पत्र में 2021 में शहरी क्षेत्र में अनुमानित जनसंख्या 13 लाख बताई गई है। लेकिन वर्तमान में ही यह जनसंख्या करीब 12 लाख पहुंच चुकी है।