अजमेर. स्कूली शिक्षा में खेलों को बढ़ावा देने के भले ही लाख दावे किए जा रहे हों मगर हकीकत कुछ और ही है। खिलाडिय़ों को भोजन के लिए मिलने वाला भत्ता च्ऊंट के मुंह में जीराज् की कहावत को चरितार्थ कर रहा है। भत्ता इतना कम है कि दो वक्त का भोजन भी नसीब नहीं हो रहा है। उधर, सस्ते खाने के लिए सडक़ किनारे स्थित ढाबों की दूरी इतनी की खिलाडिय़ों को ५ से ६ किलोमीटर पैदल सफर तय करना पड़ रहा है।