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फुटपाथ पर जोखिम में गुजार रहे रात, नहीं मिले आवास

– जीसीए के बाहर बागरिया परिवारों के ठिकाने – सुध नहीं लेते जिम्मेदार, खजूर की झाड़ू बनाने का काम अजमेर. सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के बाहर खजूर की झाड़ू बनाती महिलाएं। पास में उनके यहां-वहां दौड़ते-भागते बच्चे और सड़क पर वाहनों की रेलमपेल से जान का जोखिम। धूप खिली तो सर्दी से थोड़ी निजात मिली। […]

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अजमेर

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Dilip Sharma

Dec 10, 2024

- जीसीए के बाहर बागरिया परिवारों के ठिकाने

- सुध नहीं लेते जिम्मेदार, खजूर की झाड़ू बनाने का काम

अजमेर. सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय के बाहर खजूर की झाड़ू बनाती महिलाएं। पास में उनके यहां-वहां दौड़ते-भागते बच्चे और सड़क पर वाहनों की रेलमपेल से जान का जोखिम। धूप खिली तो सर्दी से थोड़ी निजात मिली। शाम को फिर उन्हीें झोंपडि़यों में आधे-अधूरे कपड़ों के साथ सर्द रात गुजारने की विवशता और बेचारगी।यह सिलसिला पिछले 50 साल से है। अजमेर के राजकीय महाविद्यालय चौराहे से हजारी बाग तक महाविद्यालय की दीवार से सटी बागरिया परिवार की करीब 40 झोंपडि़यां हैं। जिनका झाड़ू बनाने का काम और इसी से रोटी का आसरा है।

आसींद भीलवाड़ा, बिजयनगर, गुलाबपुरा, खेजड़ी आदि क्षेत्रों से आए इन परिवारों को अभी तक किसी भी सरकारी आवासीय योजना का लाभ नहीं मिला है।पत्रिका टीम ने इन परिवारों से बातचीत कर जाने हालात।

तीसरी पीढ़ी कर रही इंतजारयहां 50 साल से रह रहे हैं। कई परिवारों की तीसरी पीढ़ी है। कई बार माइक पर उद्घोषणा करते हुए सुना है कि सरकार मकान दे रही है लेकिन कोई नहीं आया। आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती।पीरूछोटे बच्चों को सर्दी में झोंपड़ी में रखना काफी मुश्किल भरा है। यह तीन माह भारी गुजरते हैं। उनके बारे में गलत धारणा है कि आवंटित मकान बेच कर फिर झोंपड़ी में आकर रहने लगे।मीरासर्दी में बच्चों व महिलाओं के लिए रैन बसेरों का इंतजाम होना चाहिए। सरकार को सर्वे करवाकर वास्तविकता का पता लगाना चाहिए।

जग्गू

निगम में जाकर अपनी परेशानी बताई। वहां अधिकारियों ने यहां से नहीं हटाने का आश्वासन दिया। लेकिन फिर भी उन्हें बार बार झोंपड़ी हटाने का अल्टीमेटम देने सरकारी विभाग के अधिकारी व कर्मचारी आते रहते हैं।

रुकमा देवी