
महल सा नजर आने लगा मौखम विलास यहां करोड़ों रूपए की लागत से बन रहा खूबसूरत पैनोरमा
मदनगंज किशनगढ़.तकरीबन सौ साल से भी अधिक पुराने गुंदोलाव झील के बीचों बीच निर्मित मौखम विलास की कायाकल्प हो गई है। लगभग खंडहर सा दिखाई देने वाला यह पर्यटक स्थल अब महल सा दिखने लगा है। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण की ओर से इसे संत नागरीदास के पैनोरमा के रूप में विकसीत किए जाने की कवायद और उसकी योजना की क्रियांविती के बाद अब इस मौखम विलास को चार चांद लग गए है। गुंदोलाव झील के बीच बना यह मौखम विलास काफी सुंदर और आकर्षक नजर आने लगा है।
राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण की ओर से मौखम विलास के भूतल स्थित बरामदों (नींव) एवं उपर बने कक्षों के जीर्णोद्वार एवं रंग रोगन समेत फर्श निर्माण कार्य किए गए। हालांकि फिलहाल जीर्णाोद्वार का कार्य किया जा रहा है। लेकिन मुख्य कमरों की कायाकल्प के बाद यहां का नजारा सुंदर बन गया है। करीब 8 महीने से लगातार जीर्णोद्वार का तेजी से कार्य किया जा रहा है और संभवत: यह कार्य सितम्बर महीने में पूरा कर पैनोरमा का उद्घाटन भी कर दिया जाएगा। आधुनिक लाइटों के साथ रात के समय यह पैनोरमा और आकर्षक दिखाई देगा। शुरूआत में राज्य सरकार ने संत नागरीदास पैनोरमा के लिए 1 करोड़ 9 लाख 83 हजार रुपए से अधिक की राशि स्वीकृत की। लेकिन निर्माण कार्य की अधिकता के चलते करीब 30 लाख 86 हजार रुपए से अधिक की राशि और स्वीकृत कर दी गई। ऐसे में अब करीब 1 करोड 40 लाख से अधिक की राशि इस पैनोरमा निर्माण पर खर्च की जानी है। ऐसा बनेगा पैनोरमा पैनोरमा में संत नागरीदास के जीवनी की किताबेंं, उनके लिखे गए ग्रन्थ, उनके चित्र, पेटिंग एवं तस्वीरें इत्यादि पैनोरमा में उपलब्ध रहेगी। यहां पर आने वाले पर्यटक इन्हें देख और पढ़ भी सकेंगें।