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Rajasthan News: विशेष स्कूलों में ‘सामान्य शिक्षक’ की तैनाती पर सवाल, निदेशालय ने मांगा जवाब

राजस्थान के दिव्यांग विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों की बजाय सामान्य शिक्षकों से अध्यापन कराए जाने की गंभीर विसंगति का मामला राज्य मानव अधिकार आयोग में विचाराधीन है।

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अजमेर

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Santosh Trivedi

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अरविन्द कौशिक

May 02, 2026

राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक बाधिर संस्थान

राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार मूक बाधिर संस्थान। साइन लैंग्वेज में बच्चों से बात करते अध्यापक। File Photo Patrika

अजमेर. भारतीय पुनर्वास परिषद (आरसीआई) नई दिल्ली द्वारा जारी किए गए बाध्यकारी विधान के अनुसार राजकीय दिव्यांग शिक्षण संस्थानों में इस क्षेत्र में विशेष रूप से दक्ष (विशेष शिक्षा) शिक्षकों को लगाने का स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद प्रदेश में इसकी पालना नहीं की जा रही।

हालांकि इसके लिए न्यायालय के निर्देश पर करीब सात साल पूर्व शिक्षा निदेशालय द्वारा नियमावली बनाई गई थी जिसमें प्रदेश में संचालित सातों विशेष विद्यालयों में प्रशिक्षित ‘विशेष शिक्षकों’ को ही पदस्थापित करने का उल्लेख है। लेकिन जमीनी स्तर पर हालात उलट हैं। नियमों की पालना नहीं करने पर अब राज्य मानव अधिकार आयोग ने शिक्षा निदेशक से इस पूरे मामले में तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।

स्वीकृत कर रखे ‘सामान्य शिक्षा’ के पद

राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, उदयपुर व बांसवाड़ा में संचालित राजकीय अन्ध व बधिर उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अध्ययनरत करीब सवा हजार विद्यार्थियों के लिए वरि. अध्यापक व अध्यापक (लेवल-2) के 203 पद स्वीकृत हैं। जिनमें सर्वाधिक 74 पद सेठ आनंदीलाल पोद्दार बधिर विद्यालय जयपुर में हैं।

इसके अलावा अजमेर के अन्ध विद्यालय में 32 व न्यूनतम 18 पद राउमावि बधिर बीकानेर को आवंटित हैं। राज्य सरकार ने सातों विशेष विद्यालयों के कुल स्वीकृत पदों के 74 फीसदी (148) पद सामान्य शिक्षा के स्वीकृत कर रखे हैं। जबकि केवल 55 पद विशेष शिक्षा के हैं।

उधर, आरसीआई एक्ट-1992 के अनुसार विशेष शिक्षा वाले विद्यालयों मेंं श्रवण बाधित व दृष्टि बाधित में निपुण व प्रशिक्षित तथा तथा सेंट्रल रिहेबिलिटेशन रजिस्टर (सीआरआर)में पंजीकृत शिक्षकों को ही लगाया जाना निर्देशित है।

मानवाधिकार आयोग पहुंचा मामला

प्रदेश के दिव्यांग विद्यार्थियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित शिक्षकों की बजाय सामान्य शिक्षकों से अध्यापन कराए जाने की गंभीर विसंगति का मामला राज्य मानव अधिकार आयोग में विचाराधीन है। शिक्षा विभाग के ही कर्मचारी डॉ.प्रकाश चंद चंडोलिया द्वारा वर्ष 2025 में इस आशय का परिवाद पेश कर आयोग के संज्ञान में मामला लााया गया था जो फिलहाल विचाराधीन है।

परिवाद में बताया गया कि विभाग में ‘विशेष श्रेणी’ के शिक्षकों की उपलब्धता के बावजूद इन विद्यालयों मेें नियम विरुद्ध ‘सामान्य शिक्षक’ लगाए जा रहे हैं। ऐसे में दिव्यांग बच्चों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षण नहीं मिल पा रहा। सामान्य शिक्षक विशेष बच्चों से सहज संवाद और तालमेल नहीं बैठा पाते। जिसका सीधा असर बच्चों के शैक्षिक विकास पर पड़ता है।

आयोग ने तलब की रिपोर्ट

राज्य मानवाधिकार आयोग में मामले की गत सुनवाई के दौरान सदस्य अशोक कुमार गुप्ता ने प्रकरण में संज्ञान लेकर शिक्षा विभाग से प्रदेश के विशेष विद्यालयों में स्वीकृत किए गए सामान्य शिक्षकों के 148 पदों का औचित्य पूछा है।

आयोग ने शिक्षा विभाग में विशेष शिक्षकों की उपलब्धता के बावजूद स्वीकृत 55 पदों में से 19 पद रिक्त रखने पर भी गंभीर सवाल उठाया है। आयोग ने इन बिंदुओं पर शिक्षा निदेशक को तार्किक तथ्यात्मक रिपोर्ट मामले की 23 जून की आगामी पेशी से पूर्व आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।

अब मिलेंगे व्याख्याता (विशेष शिक्षा)

इसी बीच अब पहली मर्तबा इन विद्यालयों में व्याख्याता (विशेष शिक्षा) के कुल 23 पदों का विद्यालयवार आवंटन कर पदोन्नति से पदस्थापन के लिए डीपीसी प्रक्रिया पूर्ण की जाकर काउंसलिंग होनी शेष है। हाालांकि इसमें भी विभाग ने बड़ा झोल छोड़ दिया है।

शिक्षा निदेशालय द्वारा गत दिनों व्याख्याता (विशेष शिक्षा) के 105 पदों पर पदोन्नति कर कार्मिकों को यथास्थान कार्यग्रहण करवाया गया है। लेकिन पदोन्नत व्याख्याताओं का विषयवार वर्गीकरण जारी नहीं किया है। इन व्याख्याताओं का पदस्थापन 12 मई तक प्रस्तावित है।

स्वीकृत पदों में सर्वाधिक 13 पद पोद्दार स्कूल जयपुर, 3 पद अजमेर तथा 2-2 पद बांंसवाडा व उदयपुर को दिए गए हैं। शेष तीन स्कूलों को 1-1 पद दिया गया है। प्रदेश के किसी भी विशेष विद्यालय में विज्ञान संकाय नहीं होकर केवल चित्रकला, इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान, लोक प्रशासन, संस्कृत साहित्य, हिंदी साहित्य, गृहविज्ञान, संगीत व अर्र्थशास्त्र ही ऐच्छिक विषय हैं। जिसके चलते द्वियांग बच्चों के अनुपात में संबंधित विषय व्याख्याता मिलने को लेकर संशय की स्थिति बनी हुई है।

मालूम हो कि वर्ष 2015 में भी वरि. अध्यापक (विशेष शिक्षा) के पदों पर पहली बार हुई पदोन्नति में भी यही विसंगति छोड़ी गई थी। जिससे जयपुर के स्कूल में विज्ञान विषय नहीं होने के बावजूद विज्ञान के 4 अघ्यापक लगा दिए गए थे। वर्तमान में भी पोद्दार स्कूल जयपुर में व्याख्याता (विशेष शिक्षा) के सर्वाधिक 13 पद आवंटित किए गए हैं। लेकिन विषयवार वर्गीकरण जारी नहीं करने से चहेतों को पदस्थापित करने का विकल्प अफसरों के पास उपलब्ध रहेगा। विषय वर्गीकरण जारी किए बगैर पदोन्नति की तार्किकता भी सवालिया हो गई है।

विशेष विद्यालयकुल स्वीकृत पदवरि.अध्या. (वि.शि.)अध्या. L-2 (वि.शि.)
सेठ आनंदीलाल पोद्दार बधिर राउमावि, जयपुर741802
राउमा अंध विद्यालय, अजमेर3208-
राउमावि प्रज्ञाचक्षु, उदयपुर2105-
राउमावि बधिर लोधा, बांसवाड़ा200404
राजकीय अंध विद्यालय, जोधपुर190202
राज. नेत्रहीन छात्रावासी उमावि, बीकानेर190202
राउमावि बधिर, बीकानेर180204
कुल2034114

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