
अश्विन मास की चतुर्दशी पर मंगलवार ठिठुराती शाम को गगन पर रजत रश्मियां बिखराते शारदीय चंद्रदेव उदित हुए तो पुष्कर घाटी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक पर अपने पिता के साथ घूमने आए कंधे पर बैठे बालक ने कुछ इस तरह चांद को छूने की जिज्ञासा जताई। जय माखीजा

अश्विन मास की चतुर्दशी पर मंगलवार ठिठुराती शाम को गगन पर रजत रश्मियां बिखराते शारदीय चंद्रदेव उदित हुए तो पुष्कर घाटी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक पर अपने पिता के साथ घूमने आए कंधे पर बैठे बालक ने कुछ इस तरह चांद को छूने की जिज्ञासा जताई।

अश्विन मास की चतुर्दशी पर मंगलवार ठिठुराती शाम को गगन पर रजत रश्मियां बिखराते शारदीय चंद्रदेव उदित हुए तो पुष्कर घाटी स्थित महाराणा प्रताप स्मारक पर अपने पिता के साथ घूमने आए कंधे पर बैठे बालक ने कुछ इस तरह चांद को छूने की जिज्ञासा जताई।
