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अजमेर
video : ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिला के…’
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video : ‘छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिला के…’

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अजमेर. मरुधरा के अलबेले गीतों ने सुनने वालों को मंत्रमुग्ध कर दिया। ढोल, मंजीरे और सितार की जुगलबंदी में सजे-धजे राजस्थानी गीतों ने लोगों के पैर थिरका दिए। राजस्थान संगीत नाटक अकादमी और जन शिक्षण संस्थान के तत्वाधान में द टर्निंग पॉइन्ट स्कूल में आयोजित पधारो म्हारे देस कार्यक्रम में यह नजारा दिखा।

 

गायक डॉ. रजनीश कुमार चारण राजस्थान के चिरपरिचित केसरिया बालम आओ नी…गीत की प्रस्तुति देकर सांस्कृतिक संध्या का आगाज किया। उन्होंने दल बादळी रो पानी… आलीजा म्हारो गोरबन्द नखराळो और जल भरियो हिम्डोला खाय…गीत सुनाया तो सुनने वालों ने भी तालियां बजाकर उत्साहवद्र्धन किया। उन्होंने मांड शैली में म्हारा सायब बसे परदेस.. सुनाकर दाद पाई। डॉ. चारण ने दिशा रामचन्दानी के साथ उमराव जी…, डाकिया रै…और पल्लो लटके रै म्हारो पल्लो..गीत की प्रस्तुति दी तो सुनने वाले भी थिरकउठे।
पारम्परिक राजस्थानी लोक गीत ऐ म्हारी घूमर छे… एवं गणगौर ने समां बांध दिया। चारण ने धन म्हारो देस बीकाणा… पणिाहारी…, बिणजारी…पेश कर मरुधरा की अलबेली संस्कृति से रूबरू कराया। जद देखूं बन्ने री लाल पीली अंखियां..और जय जय राजस्थान…गीत में राजस्थान की आन-बान और शान की झलक दिखी। सितार पर हरिमोहन, तबले पर राजकुमार, ढोलक पर गोपाल, परकशन पर श्रीकृष्ण गोपाल पाराशर ने संगत दी। गायन में हेमन्त टेटरवाल ने भी सहयोग दिया। चारण ने छाप तिलक सब छीनी रे मोसे नैना मिला के…भी पेश किया। स्पिक मैके अजमेर, नाट्यवृंद, सप्तक, पृथ्वीराज फाउन्डेशन और अन्य ने सहयोग दिया। डॉ. अनन्त भटनागर, प्रो. बी.पी. सारस्वत, प्रो. प्रवीण माथुर, उमेश चौरसिया मौजूद रहे। प्रो.ऋतु माथुर ने कलाकारों का परिचय दिया। संचालन डॉ. पूनम पांडे ने किया।