2 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

मेरी खबर

icon

प्लस

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Big issue: कई रोगों की दवा है रोहिड़ा, अजमेर में गिनती लायक पेड़

रिहायशी क्षेत्र बढऩे और वन्य क्षेत्र घटने से रोहिड़ा पर जबरदस्त असर पड़ा। धीरे-धीरे यह गिनती लायक रह गया है। जबकि यह कम पानी में पनपने वाला पौधा है।

2 min read
Google source verification
rohida plant in ajmer

rohida plant in ajmer

रक्तिम तिवारी/अजमेर.

राज्य पुष्प वृक्ष रोहिड़ा अजमेर सहित अन्य जिलों में सिमट रहा है। कई रोगों के उपचार में कारगर होने के बावजूद इसकी महत्ता से लोग बेखबर हैं। अंधाधुंध कटाई, व्यावसायिक उपयोग रोककर सघन पौधरोपण किया जाए तो यह फिर राज्य और जिले की शान बन सकता है।

रोहिड़ा को राज्य पुष्प वृक्ष का दर्जा प्राप्त है। अजमेर जिले में 60-70 के दशक तक रोहिड़ा बहुतायत में था। रिहायशी क्षेत्र बढऩे और वन्य क्षेत्र घटने से रोहिड़ा पर जबरदस्त असर पड़ा। धीरे-धीरे यह गिनती लायक रह गया है। जबकि यह कम पानी में पनपने वाला पौधा है।

जिले में यहां है पौधे
गगवाना गांव, मुहामी, घूघरा, पुष्कर, महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, हाड़ी रानी बटालियन कैंपस नारेली, बड़ल्या, ब्यावर-जवाजा, नसीराबाद-केकड़ी क्षेत्र। (कहीं चार तो कहीं दो-तीन)यह है सिमटने की वजहरोहिड़ा की लकड़ी सागवान की तरह होती है। इसका व्यावसायिक उपयोग हो रहा है। बाडमेर, जोधपुर, जैसलमेर और अन्य क्षेत्रों में लकड़ी के नक्काशी का फर्नीचर, घरों, दुकानों, व्यावासियक प्रतिष्ठानों में खिड़की-दरवाजे बन रहे हैं। हैंडीक्राफ्ट्स आइटम, खिलौनों में इसका उपयोग बढ़ गया है। यही वजह है कि रोहिड़ा धीरे-धीरे सिमट गया है।

नहीं होता बीज संग्रहित
मदस विश्वविद्यालय के बॉटनी विभागाधयक्ष प्रो. अरविंद पारीक ने बताया कि रोहिड़ा का बीज संग्रहण आसान नहीं है। बीज की संरक्षण-संवद्र्धन क्षमता कम होती है है। मानसून में तत्काल नहीं रोपने पर यह खराब हो जाता है।

केवल इन जिलों में मिलता है रोहिड़ा
अजमेर, बाडमेर, बीकानेर, चूरू, जैसलमेर, जोधपुर, नागौर,पाली और सीकर

फैक्ट फाइल..
राज्य पुष्प वृक्ष-रोहिड़ा, बॉटनीकल नाम-टेकोमेला अंडुलाटा
प्रकृति-रोहिड़ा का पौधा पांच से सात मीटर ऊंचा होता है। इसकी शाखाओं का रंग हल्का सलेटी-भूरा होता है। इसका फूल हल्का पीला-सुनहरे रंग का होता है। जनवरी से अप्रेल तक रोहिड़ा में पुष्प खिलते हैं।
व्यावसायिक महत्ता-इसकी लकड़ी का उपयोग फर्नीचर बनाने में होता है। इसीलिए ऐसे डेजर्ट टीक या मारवाड़ टीक भी कहते हैं।
औषधीय महत्ता- मूत्र, यकृत, सिफलिस, गोनेरिया और अन्य रोगों के उपचार में रोहिड़ा कारगार माना जाता है।

राज्य में रोहिड़ा की स्थिति खराब है। हल से खेती होने के कारण बीज जमीन में पनप जाते थे। ट्रेक्टर से खेती, अतिक्रमण, अवैध कटाई के बाद हालात बदल गए हैं। इसको संरक्षित रखने के गंभीरता से प्रयास करने की जरूरत है।
डॉ. मनोज यादव, ऐसोसिएट प्रोफेसर बॉटनी, एसपीसी-जीसीए