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एफटीएल तक नहीं पहुंचा बीसलपुर बांध, अच्छी बारिश की भी नहीं आस

- बीसलपुर से रोजाना साढ़े चार सेमी पानी हो रहा खाली - सिंचाई के लिए भी छोड़ा जा रहा पानी

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अजमेर

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Dilip Sharma

Sep 13, 2023

एफटीएल तक नहीं पहुंचा बीसलपुर बांध, अच्छी बारिश की भी नहीं आस

एफटीएल तक नहीं पहुंचा बीसलपुर बांध, अच्छी बारिश की भी नहीं आस

अजमेर. इस साल का मानसून सीजन बीतने को है। शहर में जलापूर्ति पर्याप्त नहीं हो रही है। यह स्थिति दो साल बाद बन रही है। हालत ऐसी है कि बीसलपुर बांध में इस बार पानी फुल टैंक लेवल (एफटीएल) पर नहीं पहुंचा है। ऐसे में पानी का किफायती उपयोग नहीं करने पर अगले साल गर्मी तक जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।

पिछले साल जुलाई में अच्छी बरसात के कारण बीसलपुर बांध भराव क्षमता 315.50 को पार कर गया था। अन्य जलस्रोत भी लबालब थे। इस बार कम बरसात के कारण सितंबर के पहले पखवाड़े तक भी बीसलपुर पूरा नहीं भरा है। आगामी दिनों में भी तेज बारिश की संभावना कम ही नजर आ रही है।4.5 सेमी. पानी की रोज निकासी

सिंचाई विभाग के अनुसार बीसलपुर से प्रतिदिन दो सेमी पानी पेजयल के लिए जयपुर व अजमेर के लिए निकाल रहा है। बांध का जल स्तर 313.50 मीटर से अधिक होने पर सिंचाई के लिए ढाई सेमी पानी रोज छोड़ा जाता है। यानी प्रतिदिन पीने व सिंचाई के लिए करीब 4.5 सेमी पानी काम में आ रहा है। बांध का जल स्तर 311 मीटर आने तक सिंचाई के लिए भी जरूरत के अनुसार पानी खोला जाता है। इस बार आगामी फसल बुवाई के लिए सिंचाई का पानी छोड़ा जाएगा।

केवल एक बांध से निर्भरता

बीसलपुर बांध का निर्माण बनास, खारी व डाई नदियों के संगम पर किया गया है। अजमेर में जलापूर्ति व शेष पानी से सिंचाई कार्य करना था। बाद में जयपुर और टोंक को जोड़ा गया। बांध का कैचमेंट एरिया लगभग 28 हजार 800 वर्ग किमी है। इसमें कुल जलभराव क्षेत्र में 21 हजार 300 हेक्टेयर भूमि है।

313. 75 मीटर पर थमा बांध

बीसलपुर बांध का जल स्तर 313.53 तक पहुंचा था। तब यह उम्मीद की जा रही थी कि बांध लबालब होकर 315.50 मीटर तक पहुंचे। लेकिन बारिश का दौर थम जाने से बांध नहीं भर सका।

बिपरजॉय में भरे थे 56 बांध

बीते जून माह में बिपरजॉय तूफान ने राज्य के 56 बांधों को लबालब कर दिया था। इससे बांधों में 660.58 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी आया था। जानकारों का मानना है कि फिलहाल आगामी मानसून तक बीसलपुर में पानी का पर्याप्त स्टोरेज है। इसके बावजूद पानी के अपव्यय को रोकना जरूरी है।