1 मई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

राजस्व मंडल: सरकारी वकील ने अपने स्तर पर खारिज करवा लिए 12 मुकदमे

सरकार की ओर से दायर अपीलों में सरकारी पैरोकार की लचर पैरवी जालौर जिले में सांचौर तहसील की करीब 80 बीघा भूमि का मामलालोक अदालत में अर्जी दायर कर कहा मुकदमें चलने योग्य नहीं बाद में मुकदमों की पुन: सुनवाई के लिए दिया प्रार्थना पत्र

3 min read
Google source verification
Court news; नालाबिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपियों को उम्रकैद

Court news; नालाबिग से सामूहिक दुष्कर्म मामले में दो आरोपियों को उम्रकैद

भूपेन्द्र सिंह
राजस्व मंडल में सरकार की ओर से मुकदमों में लचर पैरवी का एक और मामला सामने आया है। सरकारी वकील ने स्वयं के स्तर पर सरकार की ओर से दायर की गई 12 अपीलों को चलने योग्य नहीं मानते हुए लोक अदालत में प्रकरण वापसी के लिए अर्जी लगा दी। इस पर लोक अदालत ने प्रार्थना पत्र स्वीकार कर प्रकरण जरिए विड्राल खारिज कर दिए। सरकारी वकील ने अर्जी दाखिल करने से पहले सम्बंधित जिला कलक्टर व तहसीलदार से इस मामले में सहमति लेने तक की जहमत नहीं उठाई। जब अपनी गलती का भान हुआ तो अदालत में पुन: प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर इसे अपनी सद्भाविक भूल बताते हुए प्रकरण की फिर से सुनवाई की गुहार की गई है। यह मामला जालौर जिले की सांचौर तहसील की करीब 80 बीघा भूमि का है। मामला जब राजस्व मंडल के उच्चाधिकारियों की जानकारी में आया तो खलबली मच गई है।

आगे नहीं चलना चाहते केस

राजस्व मंडल में 12 मार्च 2022 को आयोजित लोक अदालत में उप राजकीय अधिवक्ता ने लोक अदालत की बेंच नम्बर 1 के सदस्य गणेश कुमार, हरिशंकर गोयल तथा ओमकार लाल दवे की बेंच में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर जालौर के 12 मुकदमों को आगे नहीं चलाने की मंशा जाहिर की। अप्रार्थी पक्ष के अधिवक्ता ने भी इस पर सहमति जताई। लोक अदालत की पीठ ने दोनों पक्षों के बीच राजीनामे के आधार पर प्रार्थना पत्र स्वीकार कर प्रकरण जरिए विड्राल खारिज कर दिए। यह मामले सरकार बनाम मफराम, पूनमाराम, बाबूलाल, रिडमलाराम, जोगाराम सहित 12 जनों के थे।
यह दिया तर्क
प्रार्थना पत्र में उप राजकीय अधिवक्ता ने पूर्व में निर्णित प्रकरणों का हवाला देते हुए कहा कि पूर्व के चार प्रकरणों में सरकार की अपीलें निरस्त की जा चुकी हैं तथा राजस्व अपील अधिकारी का निर्णय यथावत रखा गया है। ऐसे में समान तथ्यों के प्रकरण निर्णित हो जाने से इन मामलों को भी अब आगे चलाने का उद्देश्य शेष नहीं रहा है क्योंकि इसका निर्णय पूर्व के निर्णय से अलग नहीं हो सकता।
तीन दिन बाद आई सुध
लोक अदालत के तीन दिन बाद 16 मार्च 2022 को राजकीय अधिवक्ता ने मामला जानकारी में आने के बाद उप राजकीय अधिवक्ता को इन प्रकरणों को वापस रेस्टोर करने के लिए शपथ पत्र सहित प्रार्थना पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उप राजकीय अधिवक्ता की ओर से प्रस्तुत शपथ पत्र में यह माना गया है कि लोक अदालत में सहवन से प्रकरण वापस लेने का प्रार्थना पत्र मेरे द्वारा प्रस्तुत किया गया है जिसका मुझे कोई अधिकार नहीं था और ना ही सरकार की ओर से प्रस्तुत अपील को विड्रा करने का अधिकार था। यह ऑफिसर इंचार्ज तहसीलदार की अनुमति के बिना किया गया है। इसका विधि अनुसार उप राजकीय अभिभाषक को अधिकार नहीं है। मेरा कथन वाद बाहुल्यता को कम करने को लेकर था। लोक अदालत की भावना से निर्णित किए गए प्रकरणों को पुन: नम्बर पर लेते हुए पुन: सुनवाई के लिए बेंच के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।
यह है मामला
जालौर जिले की सांचौर तहसील के ग्राम आकोडिया में 18 दिसम्बर 2001 को खेती के लिए अप्रार्थीगण को जमीनों का आवंटन किया गया। आवंटन शर्तों के अनुसार भूमि पर खेती नही की गई। इसके बावजूद आवंटी के पक्ष में नामांतरण कर दिया गया। आवंटियों ने भूमि का बेचना कर दिया और खरीददार के हक में नामांतरण भी करवा दिया। आवंटन शर्तों की पालना नहीं करने पर नामांतरण तस्दीक नहीं किया गया।
जालौर कलक्टर ने 13 अप्रेल 2010 को आवंटन निरस्त कर दिया। इसके बाद परिवादियों ने राजस्व अपील अधिकारी पाली के समक्ष अपील प्रस्तुत की। राजस्व अपील अधिकारी ने कलक्टर का फैसला निरस्त कर दिया और आवंटन बहाल रखा। सरकार ने राजस्व अपील अधिकारी पाली के निर्णय को राजस्व मंडल में चुनौती दी।

इनका कहना है

यह मामला मेरी जानकारी में आते ही उप राजकीय अधिवक्ता को प्रकरण वापस रेस्टोर करवाने के निर्देश दिए गए। शपथ पत्र के साथ ही प्रार्थना प्रस्तुत करवाया गया। उप राजकीय अधिवक्ता ने प्रार्थना पत्र प्रस्तुत भी कर दिया है। मामले के तथ्यों से राजस्व मंडल के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।

शंकर लाल चौधरी, राजकीय अधिवक्ता, राजस्व मंडल

जमीनों का आवंटन गरीब लोगों को हुआ था। पूर्व में चार अपीलें सरकार की खारिज हो चुकी थीँं। ये सिमिलर मैटर थे। मेरे पास परमिशन नहीं थी लेकिन मैंने जानबूझ कर नहीं किया। केस रेस्टोरेशन के पुन: प्रार्थना पत्र लगा दिया गया है। 23 मई को सुनवाई होगी।

ओम प्रकाश, उप राजकीय अधिवक्ता, राजस्व मंडल

राजकीय अधिवक्ता ने मामले की जानकारी दी है। रजिस्ट्रार को प्रकरण परीक्षण के लिए भेजा गया है। परीक्षण के उपरांत कार्रवाई की जाएगी।

राजेश्वर सिंह, अध्यक्ष राजस्व मंडल

बड़ी खबरें

View All

अजमेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग