
cbse exam 2018
अजमेर
विद्यार्थियों को जंची हुई उत्तर कॉपी की प्रति देने से संबंधित कार्यक्रम अब जारी नहीं हुआ है। इसको लेकर विद्यार्थियों की निगाहें सीबीएसई पर टिकी हैं।
सीबीएसई प्रतिवर्ष बारहवीं और दसवीं के विद्यार्थियों को अंकों की गणना और जंची हुई उत्तर कॉपी की प्रति लेने की सुविधा देता है। अंकों की गणना के लिए विद्यार्थी प्रति विषय निर्धारित फीस देकर ऑनलाइन आवेदन करते हैं।
अंकों की गणना के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थी की जंची की उत्तर कॉपी की प्रति भी लेते हैं। इसके लिए उन्हें प्रति विषय फीस देनी पड़ती है। इस बार बोर्ड ने बारहवीं और दसवीं के नतीजे निकालने के बाद भी यह कार्यक्रम जारी नहीं किया है। कई विद्यार्थियों के विषयवार कम नम्बर आए हैं। उन्हें कॉपी देखने और अंक गणना का इंतजार है।
पुनर्मूल्यांकन सुविधा समाप्त
बोर्ड ने बारहवीं में वर्ष 2014-15 में पुनर्मूल्यांकन सुविधा शुरू की थी। विद्यार्थियों का ज्यादा रुझान नहीं मिलने से सीबीएसई दो साल से पुनर्मूल्यांकन सुविधा समाप्त कर चुका है।
यह रहा था दसवीं का परिणाम
अजमेर रीजन का कुल परिणाम 91.85 प्रतिशत रहा। यह पिछले पिछले वर्ष के 93.30 प्रतिशत के मुकाबले यह 1.45 प्रतिशत कम रहा। छात्रों के मुकाबले छात्राओं का परिणाम फिर बेहतर रहा। रीजन में 1 लाख 81 हजार 318 विद्यार्थी पंजीकृत थे। इनमें से करीब 1 लाख 80 हजार 871 ने परीक्षा दी। रीजन में छात्राओं का परिणाम 94.62 प्रतिशत रहा है। जबकि छात्रों का परिणाम 90.06 प्रतिशत रहा।
यूं रहा था बारहवीं का नतीजा
अजमेर रीजन का कुल परिणाम 86.40 प्रतिशत (पिछले साल 84.20) रहा। यह पिछले साल के मुकाबले 2.20 प्रतिशत ज्यादा रहा। जबकि साल 2016 में यह 86.44 प्रतिशत था।रीजन में छात्राओं का परिणाम 90.30 प्रतिशत रहा। बीते साल (88.60) के मुकाबले छात्राओं के परिणाम में 1.70 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। छात्रों का नतीजा महज 83.70 प्रतिशत रहा।
इस साल बोर्ड ने कराई परीक्षा
वर्ष 2009-10 से 2016-17 तक सतत एवं समग्र मूल्यांकन के तहत स्कूल और बोर्ड आधारित परीक्षाएं कराई गई थी। । विद्यार्थियों को स्कूल और बोर्ड पैटर्न से परीक्षा देने के सुविधा मिलती थी। इस साल सीबीएसई ने ही सभी विद्यार्थियों की परीक्षा कराई है।
पेपर लीक ने किया था परेशान
सालाना परीक्षाओं के दौरान 25 मार्च में दसवीं के पेपर आउट घटना ने देश में हलचल मचा दी। यह पेपर वॉट्सएप पर वायरल होने की शिकायत मिली थी। देश भर में विद्यार्थी तनाव में आ गए। जांच और तथ्यों के आकलन के बाद गणित का पेपर दोबारा नहीं कराने का फैसला हुआ। इसके बाद विद्यार्थियों को कुछ राहत मिली।
Published on:
31 May 2018 06:30 am
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