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Cbse results: देश में 5 वें स्थान पर रहा अजमेर रीजन

पिछले साल था तीसरे स्थान पर। इस बार दो पायदान का हुआ नुकसान।

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cbse ajmer region

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अजमेर.

दसवीं के परिणाम में अजमेर रीजन पिछली बार के मुकाबले लुढ़क गया है। इस साल 96.93 प्रतिशत के साथ रीजन पांचवें पायदान पर रहा है।

जबकि पिछली मर्तबा रीजन 95.35 प्रतिशत के साथ देश में तीसरे स्थान पर था। पिछले साल के मुकाबले इस बार अजमेर रीजन का परिणाम 1.58 प्रतिशत बढ़ा लेकिन रीजन दो पायदान नीचे लुढ़क गया। मालूम हो कि साल 2018 में अजमेर रीजन 93.03 प्रतिशत परिणाम के साथ चौथे स्थान पर रहा था।

दसवीं के परिणाम में 99.28 ( पिछले साल 99.85) प्रतिशत के साथ तिरुवनंतपुरम रीजन प्रथम और 98.95 प्रतिशत (पिछले साल 99 प्रतिशत) के साथ साथ चेन्नई रीजन द्वितीय रहा है।

यूं रहे रीजन के परिणाम
बेंगलूरू-98.23
पुणे-98.05
पंचकुला-94.31
भुवनेश्वर-93.20
भोपाल-92.86
चंडीगढ़-91.83
पटना-90.69
देहरादून-89.72
प्रयागराज-89.12
नोएडा-87.51
दिल्ली पश्चिम-85.96
दिल्ली पूर्व-85.79
गुवाहाटी-79.12

अगस्त या सितंबर में हो सकती हैं सीबीएसई की सप्लीमेंट्री परीक्षा

अजमेर. सीबीएसई की बारहवीं और दसवीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा अगस्त या सितंबर में कराई जा सकती हैं। कोरोना संक्रमण के चलते बोर्ड को परीक्षाओं को लेकर सतर्कता बरतनी होगी।

इस बार दसवीं और बारहवीं परीक्षाओं में अजमेर, नोएडा, बेंगलूरू, पश्चिम दिल्ली, प्रयागराज, देहरादून, तिरुवनंतपुरम, पटना, पुणे, भोपाल, भुवनेश्वर, चेन्नई, गुवाहाटी और पंचकुला रीजन में करीब 32 लाख विद्यार्थी शामिल हुए हैं। प्रतिवर्ष मुख्य परीक्षा में कम नंबर आने पर विद्यार्थियों को सप्लीमेंट्री परीक्षा में शामिल किया जाता है। ऐसे विद्यार्थियों की परीक्षाएं जुलाई के दूसरे पखवाड़े में होंगी। अजमेर रीजन में बारहवीं में 10 हजार 361 विद्यार्थियों के सप्लीमेंट्री आई है। दसवीं में 3 हजार 559 विद्यार्थियों को सप्लीमेंट्री के योग्य माना गया है। मालूम हो कि बारहवीं के सभी विषयों की सप्लीमेंट्री परीक्षा एक ही दिन में होती हैं। दसवीं की विषयवार श्रेणी सुधार/पूरक परीक्षा एक सप्ताह तक चलती है।

कोरोना संक्रमण पर नजर
कोरोना संक्रमण चलते बोर्ड को बारहवीं की 29 विषयों और दिल्ली रीजन की बकाया परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ी थीं। विद्यार्थियों को आंतरिक मूल्यांकन से अंक दिए गए। अब सप्लीमेंट्री परीक्षाएं कराई जानी हैं। कोराना संक्रमण लगातार बढऩे के कारण बोर्ड के लिए यह परीक्षाएं कराना आसान नहीं होगा।