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पानी के बाघ को रास आ रही चंबल, डॉल्फिन का कुनबा बढऩे का अनुमान

- जलीय जीव गणना के शुरुआती आंकड़े उत्साहजनक - धौलपुर-मुरैना क्षेत्र में फरवरी में होगी जलीय जीव गणना - भारत में करीब दो हजार डॉल्फिन - अत्यधिक संकटग्रस्त की श्रेणी में है शामिल . स्तनपायी जलीय जीव डॉल्फिन को चंबल का पानी रास आ रहा है। यहां डॉल्फिन का कुनबा पिछले साल की अपेक्षा बढ़ा है। उत्तर प्रदेश क्षेत्र में चंबल में जलीय जीवों की चल रही गणना के दौरान यह जानकारी सामने आई है। हालांकि आधिकारिक आंकड़े फरवरी 2022 में जारी होंगे। बता दें, देश में ब्रह्मपुत्र और गंगा के साथ चंबल में भी

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अजमेर

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Dilip Sharma

Dec 23, 2021

पानी के बाघ को रास आ रही चंबल, डॉल्फिन का कुनबा बढऩे का अनुमान

पानी के बाघ को रास आ रही चंबल, डॉल्फिन का कुनबा बढऩे का अनुमान

धौलपुर. स्तनपायी जलीय जीव डॉल्फिन को चंबल का पानी रास आ रहा है। यहां डॉल्फिन का कुनबा पिछले साल की अपेक्षा बढ़ा है। उत्तर प्रदेश क्षेत्र में चंबल में जलीय जीवों की चल रही गणना के दौरान यह जानकारी सामने आई है। हालांकि आधिकारिक आंकड़े फरवरी 2022 में जारी होंगे। बता दें, देश में ब्रह्मपुत्र और गंगा के साथ चंबल में भी डॉल्फिन की अच्छी खासी संख्या है। मुफीद बहाव, साफ पानी व ऑक्सीजन की प्रचुर मात्रा के चलते चंबल में उनकी संख्या बढ़ रही है। उत्तर प्रदेश की इटावा चंबल सेंचुरी के डीएफओ दिवाकर श्रीवास्तव ने बताया कि अभी नदी में जलीय जीवों की गणना चल रही है। जो कई चरणों में पूरी होगी। पिछले साल हुई गणना में करीब 150 डॉल्फिन के जोड़े नदी में दिखे थे। इस बार 12-13 जोड़े बढऩे का अनुमान है। डीएफओ के मुताबिक इसी तरह अगर चंबल में डॉल्फिन का परिवार बढ़ता रहा तो चंबल को डॉल्फिन नदी के नाम से भी पहचान मिल जाएगी।

धौलपुर-मुरैना क्षेत्र में फरवरी में गणना

बता दें, फिलहाल मध्य प्रदेश में मुरैना सीमा से उत्तर प्रदेश क्षेत्र में जलीय जीव गणना का कार्य चल रहा है। धौलपुर-मुरैना क्षेत्र में फरवरी में गणना आरंभ की जाएगी। मुरैना डीएफओ अमित निगम के अनुसार यहां की भी गणना होने के बाद फरवरी अंत तक पूरे आंकड़े जारी किए जाएंगे। निगम के अनुसार इस बार घडिय़ाल, मगरमच्छ, कछुए और डॉल्फिन सहित सभी जलीय जीवों की संख्या बढऩे का अनुमान है।

सामाजिक स्तनधारी प्राणी है डॉल्फिन

डॉल्फिन स्तनधारी प्राणी है। इन्हें अकेले रहना पसंद नहीं है। ये 10 से 12 के समूह में रहती हैं। डॉल्फिन को सांस लेने के लिए हर 15 मिनट में सतह पर आना होता है। मादा डॉल्फिन नर से बड़ी होती है। इनकी औसत आयु 28 साल है। डॉल्फिन एक बार में एक ही बच्चा देती है। प्रसव के कुछ दिन पहले गर्भवती डॉल्फिन की देखभाल के लिए पांच से छह मादा डॉल्फिन उसके पास रहती हैं। केंद्र सरकार ने पांच अक्टूबर 2009 में गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया था। गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन एक नेत्रहीन जलीय जीव है। जिसकी सूंघने की क्षमता बड़ी तीव्र होती है। भारत में इनकी संख्या 2000 से भी कम है।

अनुसूची-1 की प्रजाति

डॉल्फिन वन्य जीव अधिनियम की अनुसूची-1 की प्रजाति है, जिसे अत्यधिक संकटग्रस्त माना जाता है और इसका शिकार करने वाले को सात साल की कैद और 50,000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है। यदि दोषी व्यक्ति जुर्माना नहीं दे पाता है, तो उसे छह महीने और जेल की सजा काटनी होगी।