12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

अजमेर

फुटबॉल की ‘किक’ से आउट हुए बाल-विवाह व गौना

फुटबॉल ने बदली बालिकाओं व महिलाओं की सोच, अजमेर जिले के 4 गांवों में बालिकाओं के फुटबॉल क्लब ने बदली िस्थति

Google source verification

अजमेर. ग्रामीण क्षेत्रों में बाल-विवाह एवं कम उम्र में गौना कर बालिकाओं को विदा करने की परंपरा पर अब कुछ हद तक विराम लगा है। सामाजिक कुरीतियों एवं सोच में बदलाव आया है। अजमेर से करीब 30 किमी दूर हासियावास गांव के साथ तीन अन्य गांवों में अब बालिकाओं को पढ़ाने एवं फुटबॉल खेलने पर अभिभावक आगे आ रहे हैं। हासियावास में कई परिवार जो बालिकाओं को बढ़ने के लिए बाहर नहीं भेजते थे वे फुटबॉल के मैच के लिए नेपाल, लखनऊ, नोएडा, जयपुर, अजमेर सहित अन्य जगह भेज रहे हैं। यहां की बालिकाओं ने कई राज्य व राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियाओं में हिस्सा लिया है।

महिला जन अधिकार समिति ने की पहल

महिला जन अधिकार समिति की ओर से हासियावास, तेवडों की ढाणी, चाचियावास, भवानी खेड़ा एवं पदमपुरा में बालिकाओं को फुटबॉल खेल के लिए प्रेरित किया। इसका असर यह हुआ कि इन गांवों में करीब 300 बालिकाओं फुटबॉल खेल रही हैं।

शुरुआत में मना करते थे खेलने से

शुरू में जब फुटबॉल खेलने लगे तो गांव वाले मना कर देते थे, लेकिन अब लड़कियां अच्छा खेल रही हैं तो माता-पिता के साथ गांव वाले भी खेलने को प्रेरित करने लगे।- प्रियंका, फुटबॉल खिलाड़ी, हासियावास

गांव का नाम रोशन करना हैफुटबॉल में खेलकर गांव का नाम रोशन करना है। लोगों का दिल जीतना है। अब अच्छा लगता है। घर में अब बाल विवाह की बातें नहीं होती हैं।

कोमल, फुटबॉल खिलाड़ी

बेटियां ही कर देती हैं इंकार

वर्ष 2016 से फुटबॉल खेल रही हूं। गांव में बालिकाएं फुटबॉल खेलने व कई टूर्नामेंट में बाहर भी हिस्सा लेकर आई हैं। अब गांव में लोगों की सोच में बदलाव आया है। बाल विवाह भी कम हो गए हैं। अब लड़की खुद कम उम्र में शादी से इंकार कर देती हैं। कई बार जरूरत बड़ी तो समिति की इंदिरा पंचोली ने अभिभावकों को समझाया।सुमन गुर्जर, फुटबॉल खिलाड़ी

बदल दी बालिकाओं की जिंदगी

समय के साथ ग्रामीणों को लगा कि उनकी बेटियां कुछ कर सकती हैं। सोच में परिवर्तन आया, बच्चियां बाहर भी खेलने जाती हैं। फुटबॉल ने बालिकाओं की जिन्दगी बदल दी। मैदानों की स्थिति अच्छी नहीं है। सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।

– निराज, फुटबॉल खिलाड़ी

ग्रामीण पूरा कर रहे सहयोगबच्चियां आसाम, मणिपुर, नोएडा, कर्नाटक भी खेलकर आई हैं। जनसहयोग से आठवीं से स्कूल को 12 वीं तक क्रमोन्नत करवाया है। महिलाएं भी बच्चियों को बढ़ाना चाहती हैं। ग्रामीण पूरा सहयोग कर रहे हैं।

रामलाल भड़ाना, ग्रामीणछोटी बच्चियों की शादी अब बंद

अब छोटी बच्चियों की शादी बंद कर दी है। अब 18 साल के बाद ही बेटियों की शादी करते हैं। बच्चियां अन्य शहरों में भी खेलने जा रही हैं। बेटियां गांव व समाज का नाम रोशन कर रही हैं।

रूपाराम गुर्जर, ग्रामीण