
म्हारे शहर की छोरियां नहीं छोरां स कम, फर्राटा सूं बुलट दौड़ाबा म नम्बर 1
प्रीति भट्ट. अजमेर . आज हर क्षेत्र में लड़कियां अपना परचम फहरा रही हैं। यहां तक कि लड़ाकू विमान उड़ाने में भी लड़कियों ने अपने हौंसले और आत्मविश्वास का लोहा मनवा लिया है तो गल्र्स के लिए बाइक चलाना कोई मुश्किल टास्क नहीं है। कुछ समय पहले तक बाइक चलाना केवल लड़कों का ही शौक समझा जाता था लेकिन पिछले कछ वर्षों से अब शहर में भी गल्र्स में मोटरसाइकिल दौड़ाने का क्रेज बढऩे लगा है।
नॉर्मल मोटरबाइक के साथ ही गल्र्स का रुझान अब भारी बाइक्स की ओर भी तेजी से बढ़ रहा है।नाजुक एवं कोमल समझी जाने वाली लड़कियां जब फर्राटे से हैवी बाइक चलाकर शहर से गुजरती हैं तो आने-जाने वाले लोगों की नजरें बरबस ही इन लड़कियों पर टिक जाती हैं। कुछ लड़कियों ने इसे शौकिया ही चलाना शुरू किया था परन्तु अब यह इनका फेवरिट व्हीकल बन गया है। इससे उनका कॉन्फिडेंस बढ़ता है और उन्हें अच्छी वाली फीलिंग आती है और वे बड़ी आसानी से इसे चला लेती हैं। पहले तो लड़कियों के लिए लाइट वेट वाले व्हीकल्स जैसे स्कूटी वगैरह को ही सही समझा जाता था अब गल्र्स सुजुकी, स्पलेंडर, प्लेटिना, अपाचे व बुलट आदि गाडिय़ां बड़े आराम से चला रही हैं।
सभी बाइक्स चलानें में महारत
नसीराबाद से बाइक पर आने वाली शिक्षिका काजल लोहार ने बताया कि बाइक चलाना पापा ने सिखाया। पहले थोड़ी दिक्कत आती थी लेकिन अब तो बाइक पर कॉलेज आना बहुत कूल लगता है। कई तरह की बाइक्स घर में है। फिलहाल प्लेटिना से कॉलेज आती हूं बाकि अन्य बाइक्स भी चलाने में महारत हो गई है।
'इन्ट्रेस्ट ने सिखाया बाइक चलाना
शिखा हांडा ने बताया कि वैसे तो मैंने सभी टू-व्हीलर चला ए हैं लेकिन शुरू से ही मेरा इंट्रेस्ट बाइक चलाने में ही था। इसलिए बाइक चलाना सीखा और यह बेहद स्मूथ चलती है तो चलाने में बहुत मजा आता है।
'सपना है रॉयल इंफील्ड चलाना
प्रज्ञा निशि ने बताया कि बचपन से ही ड्राइविंग का विशेष शौक रहा है। पहले स्कूटी चलाई फिर पापा के सहयोग से बाइक चलाना सीख लिया। बाइक चलाना आसान है कोई भी चला सकता है कोई परेशानी नहीं होती। पहले मैं पापा के पीछे बैठकर जाती थी अब पापा मेरी बाइक के पीछे बैठते हैंं अच्छा लगता है। रॉयल इन्फील्ड मेरा ड्रीम है ।
'गल्र्स के लिए टफ कुछ भी नहीं
नेहा कुशवाहा ने बताया कि मुझे बुलट चलाने का विशेष शौक है और राइडर बनना चाहती हूं। गल्र्स के लिए टफ कुछ भी नहीं हैं। रॉयल इन्फील्ड चलाने से रॉयल फील आती है ।
'नहीं है कोई बड़ी बात
कविता चौधरी ने बताया कि मैं आठवीं से बाइक चला रही हूं। बाइक पर बैठकर शहर में जब निकलती हूं तो एक अलग ही कॉन्फिडेंस अपने आप में डवलप होता है। जब गल्र्स डॉक्टर, इंजीनियर बन सकती हैं तो बाइक चलाना कोई बड़ी बात नहीं है।
Published on:
27 Jul 2018 01:06 pm
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