
Short-Term Course : कॉलेज-यूनिवर्सिटी से हासिल डिग्री की बदौलत नौकरी या बिजनेस करने वाले अब शॉर्ट टर्म कोर्सेस में भी हाथ आजमा रहे हैं। ये कोर्स उन्हें मौजूदा चुनौतियों से निपटने में तो मदद करते हैं। साथ ही कॅरियर में फायदा पहुंचाने में मददगार बन रहे हैं। ऐसे कोर्स की डिमांड धीरे-धीरे बढ़ रही है।
युवाओं की शॉर्ट टर्म कोर्स में रुचि बढ़ रही है। व्यावसायिक उन्नति और महारत हासिल करना सबसे बड़ी चाहत है। शॉर्ट टर्म कोर्स में कोडिंग, मार्केटिंग, ग्राफिक डिजाइन, कंप्यूटर-डिप्लोमा, सर्टिफिकेट इन बर्डिंग, फूड एंड डाइटेक्टिस, ऑफिस मैनेजमेंट और अन्य शामिल हैं। अजमेर सहित देश के कई कॉलेज में ऐसे कोर्स संचालित हैं।
फैक्ट फाइल
950 से ज्यादा यूनिवर्सिटी हैं देश में
2 लाख से ज्यादा कॉलेज
5.50 करोड़ से ज्यादा विद्यार्थी अध्ययनरत
5 हजार से ज्यादा शॉर्ट टर्म कोर्स
तीन माह से एक साल तक के कोर्स
डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेस की अवधि अलग-अलग है। ज्यादातर सर्टिफिकेट कोर्स 2 से 6 माह अथवा एक वर्ष तक के हैं। डिप्लोमा कोर्स की अवधि एक से तीन साल तक की है। कई पाठ्यक्रम ऑनलाइन मोड पर भी उपलब्ध हैं। जो विद्यार्थी कामकाज के चलते नियमित क्लास नहीं जा पाते उनके लिए ऑनलाइन कोर्स बेहतर विकल्प है।
पहले शॉर्ट टर्म कोर्स में सिर्फ कम्प्यूटर, प्रोग्रामिंग, टैली जैसे कोर्स ही चलन में थे। अब इंटीरियर डिजाइनिंग से लेकर इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट, लॉजिस्टिक सप्लाय, डिजिटल मार्केटिंग, आर्टिफिशयल इंटेलीजेंस, न्यूट्रिशन एंड डायटीटिक्स जैसे कोर्स ट्रेंड में हैं। इन कोर्स के लिए उम्र या फिर न्यूनतम योग्यता के बंधन नहीं होते हैं। विद्यार्थियों समेत वर्किंग प्रोफेशनल्स भी यह कोर्स कर रहे हैं।-प्रो. आलोक चतुर्वेदी, एसपीसी-जीसीए
सिर्फ यूजी-पीजी की डिग्री लेना अब प्लेसमेंट का आधार नहीं है। शॉर्ट टर्म कोर्स कॅरियर में काफी मददगार हैं। यह प्रोफेशनल ग्रोथ के लिए भी जरूरी हैं।- महिपाल गोदारा, छात्रसंघ अध्यक्ष, मदस विवि
शॉर्ट टर्म कोर्स के बिना कॅरियर में कामयाबी नहीं मिलती है। नियमित डिग्री के साथ शॉर्ट कैपस्यूल कोर्स करने चाहिए। कैंपस प्लेसमेंट में भी प्रोफेशनल स्किल्स को पूछा जाता है।
दिनेश चौधरी, छात्र
Published on:
01 Jun 2023 12:31 pm
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