
आनासागर झील किनारे अब भी जारी हैं कच्चे-पक्के निर्माण
अजमेर. नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा आनासागर झील किनारे ग्रीन बेल्ट एरिया में निर्माण तोड़ने के स्पष्ट आदेश के बावजूद जिला प्रशासन एवं जिम्मेदार अधिकारी निर्णय की पालना में कोई संजीदगी नहीं दिखा रहे। उधर, झील किनारे कच्चे-पक्के निर्माण दिन-रात जारी हैं। साथ ही संबंधित विभाग एनजीटी के फैसले को चुनौती देकर स्थगन के रूप में राहत हासिल करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं।
आनासागर झील के दायरे एवं ग्रीन बेल्ट एरिया में सरकारी निर्माण को एनजीटी ने नियम विपरीत बताते हुए दो माह में ध्वस्त करने के आदेश दिए थे। इनमें एक बड़ा निर्माण सेवन वंडर भी झील की परिधि में शामिल है। पाथ-वे सहित अन्य सरकारी निर्माण की आड़ में कई अतिक्रमियों एवं कथित खातेदारों की ओर से अभी भी कच्चे-पक्के निर्माण करवाए जा रहे हैं।फिर शुरू हुए रेस्टोरेंट-प्रतिष्ठान
राजस्थान झील संरक्षण समिति के एक्शन के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर नगर निगम ने कई अतिक्रमण ध्वस्त भी किए। लेकिन अब फिर से इनमें कच्चे निर्माण होने के साथ व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। नए रेस्टोरेंट व व्यावसायिक प्रतिष्ठान खुल रहे हैं। उधर कुछ खातेदारों ने स्थगन आदेश ले रखे हैं।इनका कहना है
झील से घिरे प्रतिबंधित क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां अवैध रूप से संचालित की जाती हैं तो उन्हें सूचीबद्ध कर तथ्यात्मक रिपोर्ट मंंगवाई जाएगी। इसके बाद संबंधित विभाग को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के लिए निर्देशित किया जाएगा।
ब्रजलता हाड़ा, महापौर, नगर निगम अजमेर।
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एनजीटी के आदेश पर सब मौन
एनजीटी की ओर से 60 दिन में ग्रीन एरिया में कथित निर्माण कार्यों को ध्वस्त करने व हटाने के आदेश के बावजूद अभी तक प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिला प्रशासन, स्मार्टसिटी, नगर निगम एवं अजमेर प्राधिकरण की ओर से कोई कवायद शुरू नहीं की गई है।
विधिक राय लेने में जुटा निगम, सुप्रीम कोर्ट में अपील की तैयारी
अजमेर. एनजीटी की ओर से गत दिनों दिए फैसले के बाद नगर निगम प्रशासन विधिक राय लेने में जुट गया है। निगम विधिक राय लेने के बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करेगा। एनजीटी ने अपने फैसले में दो माह में यानि 31 अक्टूबर तक ग्रीन व ओपन एरिया में बनाए गए निर्माण जिनमें सेवन वंडर्स, गांधी स्मृति पार्क, आजाद पार्क में कॉम्प्लेक्स व स्वीमिंग पूल को पार्क की भूमि का हिस्सा बताते हुए इन्हें दो माह में ध्वस्त करने या हटाने के आदेश दिए हैं। निगम इसे लेकर अब सुप्रीम कोर्ट की शरण लेगा।
Published on:
02 Sept 2023 11:59 pm
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