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Corona: एमडीएस यूनिवर्सिटी, इंजीनियरिंग कॉलेज में कोरोना की दस्तक

टीम ने स्टाफ सहित विद्यार्थियों के सैंपल लिए। कॉलेज में सोडियम हाइपो क्लोराइट का छिड़काव किया गया।
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अजमेर

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raktim tiwari

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Updated: 10 Jan 2022, 10:03 AM IST

corona impact on institutions

corona impact on institutions

अजमेर. इंजीनियरिंग कॉलेज बड़ल्या और महर्षि दयानंद सरस्वती में कोरोना-ओमिक्रॉन ने दस्तक दी है। जहां कॉलेज में शिक्षक और स्टाफ के कुछ सदस्य की रिपोर्ट पॉजीटिव आई। सूचना मिलने पर सोमवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम कॉलेज पहुंची। टीम ने स्टाफ सहित विद्यार्थियों के सैंपल लिए। कॉलेज में सोडियम हाइपो क्लोराइट का छिड़काव किया गया। वहीं विश्वविद्यालय में लेखा शाखा कार्मिक के कोरोना पॉजिटिव आने पर सोमवार को स्टाफ की जांच कराई गई।

प्राचार्य और स्टाफ के कुछ कार्मिकों ने हल्के बुखार-जुखाम के चलते कोरोना टेस्ट कराया। इसमें कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट आई। सोमवार को प्रशासन ने तत्काल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीम को सूचना दी। टीम ने हॉस्टल और कैंपस में आए विद्यार्थियों, शिक्षकों और अन्य कार्मिकों के सैंपल लिए। कॉलेज में सोडियम हाइपोक्लोराइट का छिड़काव किया गया। इसी तरह विवि की लेखा शाखा कार्मिक के शुक्रवार को कोरोना पॉजिटिव आने के बाद सोमवार को स्टाफ का टेस्ट कराया। यहां भी सेनेटाइजर का छिड़काव किया गया।

खुद को किया आइसोलेट
प्राचार्य और स्टाफ के कुछ सदस्यों के कोरोना पॉजिटिव आने पर खुद को घर में आइसोलेट कर लिया। प्राचार्य ने सरकार की गाइडलाइन्स के अनुसार 50 प्रतिशत विद्यार्थियों-स्टाफ को ही कॉलेज में आने, ऑनलाइन कक्षाएं जारी रखने के निर्देश दिए। साथ ही कोरोना टेस्ट कराने, दोनों डोज लेने की बात कही है।

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रक्तिम तिवारी/अजमेर. इंजीनियरिंग कॉलेज विद्यार्थी अब तकनीकी शिक्षा के साथ सामाजिक कार्य से जुड़ेंगे। वे कॉलेज में ब्रांचवार नए कोर्स पढऩे के साथ-साथ प्रतिमाह एक दिन गांवों में जाकर ग्रामीणों को बैंकिंग प्रणाली, सरकारी योजनाओं की जानकारी देने, कंप्यूटर प्रशिक्षण और अन्य कार्य में मदद करेंगे।

ये है सोशल आउटरीच...

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा कौङ्क्षसल और तकनीकी शिक्षा विभाग ने सभी इंजीनियरिंग कॉलेज को सोशल आउटरीच कार्यक्रम को बढ़ावा देने को कहा है। इसमें बी.टेक और एम.टेक करने वाले विद्यार्थियों को राष्ट्रीय सेवा योजना और उन्नत भारत योजना के तहतत प्रतिमाह एक अथवा आधा दिन ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर सेवा करने पर जोर दिया गया है।