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कोरोना इफेक्ट : विदेशों में भारतीय मसालों की बढ़ी साख, 1400 करोड़ का बढ़ा निर्यात

देश का जीरा, धनिया, सौंफ सहित अन्य मसालों की लगातार बढ़ रही है डिमांड, राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र में नई किस्मों के जारी हैं अनुसंधान

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कोरोना इफेक्ट : विदेशों में भारतीय मसालों की बढ़ी साख, 1400 करोड़ का बढ़ा निर्यात

कोरोना इफेक्ट : विदेशों में भारतीय मसालों की बढ़ी साख, 1400 करोड़ का बढ़ा निर्यात

चन्द्र प्रकाश जोशी

अजमेर. राजस्थान के बीजीय मसालों की मांग देश के विभिन्न राज्यों में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी बढ़ी है। पिछले दो साल में देश के बीजीय मसालों का 1400 करोड़ रुपए तक का निर्यात विदेश में बढ़ा है। इसमें 40 फीसदी जीरा और 60 फीसदी धनिया राजस्थान से जा रहा है।

विदेशों में भारतीय मसालों की डिमांड बढऩे के पीछे प्रमुख कारण कोरोना संक्रमण को माना जा रहा है। कोरोना से पहले वर्ष 2019-20 में जहां मसालों का विदेशों में निर्यात 4200 करोड़ रुपए का हुआ। वहीं वर्ष 2020-21 में यह बढ़कर 5665 करोड़ रुपए हो गया है। सबसे अच्छी बात यह है कि इन मसालों में धनिया का सबसे अधिक एक्सपोर्ट राजस्थान से होता है। जबकि जीरा में 60 प्रतिशत गुजरात और 40 प्रतिशत राजस्थान से है। वर्ष 2020-21 में धनिया का एक्सपोर्ट करीब 490 करोड़ रुपए का हुआ है।

यह है निर्यात बढऩे की वजह

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार कोरोना संक्रमण के दौरान मसालों को स्वास्थ्य के लिए कारगर माना गया। इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए मसालों का भी खास महत्व है। कोरोना के बाद निर्यात करीब 1400 करोड़ रुपए का बढ़ा है।

बाड़मेर, जैसलमेर का जीरा नम्बर वन

राजस्थान में बाड़मेर, जैसलमेर के जीरे की विदेशों में अच्छी डिमांड है। देश में यहां अच्छी क्वालिटी की जीरा होता है। जीरे के उत्पादन में क्लाइमेट का मुख्य रोल है। जीरे के लिए ठंड व नमी आद्र्रता कम होना जरूरी है। ड्राईक्लाइमेट से ना तो रोग होता है ना पेस्टिसाइड छिड़कना पड़ता है। यहां के जीरे में खुशबू अच्छी है। क्यूमिन एल्डीहाइड यहां के जीरे की खासियत है।

कोटा, बारां, झालावाड़ का धनिया

विदेशों में एक्सपोर्ट होने वाला अधिकांश धनिया राजस्थान के कोटा, बारां, झालावाड़ एवं रामगंज मंडी से है। विदेश में पूरे देश से निर्यात होने वाला धनिया 60 प्रतिशत राजस्थान से होता है।

देश में यहां राजस्थान के मसालों की डिमांड

राजस्थान के जीरे, धनिया, सौंफ, मैथी की डिमांड उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, हिमाचलप्रदेश, दिल्ली, तमिलनाडू, आंध्रप्रदेश, केरल, चैन्नई, पश्चिमी बंगाल में ज्यादा है।

विदेश में यहां सर्वाधिक निर्यात

मसालों में सबसे अधिक चीन, यूएसए, युएई व यूके में निर्यात हो रहा है। थाईलैंड, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इराक, ईरान में भी बीजीय मसाले निर्यात हो रहे हैं।

इनके किए अनुसंधान, यह पाइप लाइन में

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी अजमेर में धनिया की एसीआर-1, एसीआर-2, एसीआर-3 किस्म तैयार की गई है। सौंफ की कई किस्म तैयार कर ली गई है। जीरे की विशेष किस्म के लिए प्रोजेक्ट जारी है। तीन प्रोजेक्ट तीन पाइप लाइन में है। आगामी एक-दो वर्ष में नई किस्म तैयार करने की संभावना है।

फैक्ट फाइल (राजस्थान में वर्ष 2020 की स्थिति)

-1,02130 हैक्टेयर में धनिया की बुवाई

-129012 टन धनिया उत्पादन

-770000 हैक्टेयर में जीरा की बुवाई

-425000 टन जीरा उत्पादन

इनका कहना है

पिछले दो सालों में बीजीय मसालों की डिमांड विदेशों में बढ़ी है। वर्ष 2019-20 में 4200 करोड़ रुपए का मसाला के निर्यात की अपेक्षा वर्ष 2020-21 में 5665 करोड़ रुपए का निर्यात हुआ जो 1400 करोड़ रुपए अधिक है। निर्यात होने वाला देशभर के जीरा में 40 प्रतिशत राजस्थान का एवं 60 प्रतिशत धनिया राजस्थान का है।

-डॉ.एस.एन. सक्सेना, निदेशक, राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केन्द्र तबीजी अजमेर