
चीन में लोग कोरोना से ज्यादा सरकार से डरे ,वतन वापसी में फिलहाल मुश्किलें
अजमेर .कोरोना वायरस के कारण सर्वाधिक मौतों के कारण पूरी दुनिया में चर्चित रहे चीन के शहर वुहान बंदरगाह पर फंसेे अजमेर निवासी युवक को पता नहीं कि वह अब कब अपने वतन लौट सकेगा । अलपर गेट निवासी अभय मिश्रा तथा पूर्व पार्षद कुसुम मिश्रा के पुत्र प्रखर मिश्रा ने वीडियो कॉलिंग से हुई बातचीत में बताया कि मर्चेंट नेवी में नौकरी करने के दौरान करीब 5 दिन पहले वह अपनी कंपनी के जहाज से वहां पहुंचा । तभी से चीन की सरकार ने बंदरगाह से बाहर निकलने पर रोक लगा दी है। उसका कहना है कि चीन के लोग कोरोना से अधिक अपनी सरकार के अत्याचारों से भयभीत हैं।
आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता नहीं
प्रखर का कहना था कि कहने को वुहान में लॉकडाउन समाप्त कर दिया गया है लेकिन सरकार की सख्ती अभी वैसी ही लागू है । यहां आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता नहीं के बराबर है और कालाबाजारी का माहौल है।
रहना होगा क्वॉरेंटाइन में
प्रखर ने बताया कि यहां से कब रवानगी मिलेगी कहा नहीं जा सकता। फ्लाइट खुलेगी तभी वह भारत लौट सकेगा । उसका कंपनी से कॉन्ट्रैक्ट समाप्त होने को है लेकिन 14 दिन क्वॉरेंटाइन में रहने के बाद ही उसकी वतन वापसी हो सकेगी। इसके लिए वह अपने जहाज से पहले हांगकांग जाएगा। उसका कहना था कि कंपनी की ओर से सभी को अलग से ट्रीटमेंट दिया जा रहा है।
संक्रमित मिला तो घर सील
प्रखर के अनुसार चीन के लोगों से हुई बातचीत में जो तथ्य सामने आए उसके अनुसार चीन की सरकार कोरोना पीडि़तों से अपने देश को खाली कराने की तरफ अधिक ध्यान दे रही है। वहां पुलिस एक भी कोरोना पीडि़त मिलने पर पूरा घर खाली कराने के बाद सील लगाकर मकान बंद कर रहे हैं । मकान के निवासी कहां ले जाए जा रहे हैं कोई नहीं जानता । कोई हल्का सा भी विरोध करता है तो उसके साथ पुलिस का बर्ताव जानवरों जैसा होता है।
इलाज की बजाय प्रताडऩा
प्रखर के अनुसार देश को कोरोनावायरस से मुक्त कराने के लिए लोगों की इलाज के बजाय चीन की सरकार प्रताडि़त करती है । प्रखर के साथ 19 अन्य कर्मचारी जहाज पर हैं जिन्हें बंदरगाह के सीमित क्षेत्र से बाहर निकलने पर आजीवन जेल में डालने की चेतावनी दी गई है । उन सभी को विशेष निगरानी में रखा गया है और उपचार भी किया गया ।
Published on:
13 Apr 2020 12:55 pm
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