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अजमेर. कहा जाता है कि वकालत का पेश उम्र के ढलते पड़ाव के साथ रंगत पकड़ता है लेकिन राजस्व मंडल में कुछ सालों ये यह देखा गया है कि पांच से दस साल तक की वकालत के पेश से जुड़े युवा वकील लग्जरी कारों व बंगलों का ठाठ बाट उठा रहे हैं। इसके लिए मंडल के सदस्यों से नजदीकी बढ़ाना और जोड़तोड़ कर मुकदमों में पक्षकारों को जीत की निश्चिता के आधार पर मोटी रकम बनाने का खेल चल रहा है। दलाली के आरोपो में एसीबी के हत्थे चढ़े युवा अधिवक्ता के घर लाखों रुपए नगद मिलने व नोट गिनने की मशीन मिलना इसका जीता जागता उदाहरण। इस अधिवक्ता के मित्र सर्किल को भी एसीबी ने अपने रडार पर ले रखा है। इनसे भी कभी भी पूछताछ की जा सकती है।सदस्यों व बेंच तक पहुंच हुई आसान
कुछ वरिष्ठ वकीलों का कहना है कि उनके समय में राजस्व मंडल सदस्य के कक्ष में जाने के लिए पिछले बरामदे में जाने तक की भी हिम्मत नहीं कर पाते थे। वरिष्ठ वकील के सहयोग से रूलिंग देने या किसी आमंत्रण आदि की सूचना पहुंचा पाते थे। अब तक दिन भर ही वकीलों की आवाजाही मेंम्बरों के कक्ष व पीए के रूम में होती रहती है। यहां तक कि फैसले लिखने व बदलने तक कुछ वकीलों की घुसपैठ हो चुकी है।
कोर्ट के बजाय चैम्बर में हो रहे फैसले
राजस्व मंडल में एकल पीठ हो या खंड पीठ सभी के फैसलों में यह लिखा जाता है कि निर्णय खुले न्यायलय में सुनाया गया । जबकि बोर्ड में अधिकतर फैसले खुले कोर्ट रूम में सुनाए जाने बजाय बैक डोर से सदस्यों के चैम्बर में जारी किए जाते हैं। कोर्ट में तो दोनो पक्षो को सुनकर फैसला रिजर्व रख लिया जाता है फिर 'सुविधानुसारÓ किसी दिन जारी कर दिया जाता है। एक के सहमत होने के बाद दूसरा सदस्य भी फैसले पर हस्ताक्षर कर देता है। फैसले की जानकारी भी तब होती है जब वकील को पक्षकार के जरिए जानकारी मिलती है अथवा फैसले की नकल हाथ में मिलती है तब। मौजूदा प्रकरण में भी यह प्रक्रिया अपनाई जा रही थी।
मनमाफिक बेंच नहीं तो दे दो तारीख
रेवन्यू बोर्ड में राजस्व मंडल सदस्यों और वकीलों का गठजोड़ हावी है। जिस वकील की जिस सदस्य से बैठक अच्छी है वह उसी की बैंच में बहस करना चाहता है। दूसरे सदस्य की बैंच में सुनवाई के लिए केस लगने पर वह तारीख ले लेता है। इसकी जानकारी वकील अपने पक्षकारों को भी देता है। साथ ही विपक्षी पक्षकार की पहुंच का भी हवाला देकर केस के लिए मोटी रकम तय हो जाती है। पूर्व में बोर्ड के कई सदस्यों व एक अध्यक्ष भी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लग चुके हैं। वकीलों सदस्यों का होमटाउन व उनकी जातियां देखकर उनकों अपने घेरे में लेते हैं। इसके बाद स्टे करवाने से लेकर फैसला करवाने तक भ्रष्टाचार का खेल चलता रहता है।
आरएए रहते भी चर्चा में रहे मेहरडा
एसीबी की गिरफ्त में आए राजस्व मंडल में आरएएस कोटे के सदस्य बी.एल. मेहरडा अजमेर में राजस्व अपील अधिकारी के पद पर रहने के दौरान भी चर्चा में रह चुके हैं। एडीए के खिलाफ दिए गए फैसलों को लेकर वे रिकॉर्ड कायम कर चुके हैं।
तब बाल-बाल बचे थे मेहरड़ा
एसीबी की गिरफ्त में आए राजस्व मंडल सदस्य बी.एल. मेहरड़ा के चैम्बर के कमरे की छत का प्लास्टर व फॉल सीङ्क्षलग करीब 5 माह पहले भरभरा कर गिर गई थी। गनीमत रही कि मेहरड़ा करीब पांच मिनट पहले ही चैम्बर से निकले चुके थे। इसके बाद उन्हें अपना कमरा बदलना पड़ा था। इस कमरे का मलवा बाहर निकालते हुए इसकी सफाई की जा चुकी है। एसीबी ने उनके वर्तमान चैम्बर के अलावा इस कमरे को भी सीज कर दिया है।
राज्य के 13 प्रतिशत राजस्व केस राजस्व मंडल में
राज्य की राजस्व मंडल व राजस्व अधीनस्थ अदालतों में करीब 4 लाख पेंडिंग हैं। राज्य की भूमि अदालतों की सबसे बड़ी अदालत राजस्व मंडल में अकेले 13 प्रतिशत केस राजस्व मंडल में पेंडिगं है। इसके अलावा 3 प्रतिशत डीसी कोर्ट में 4 प्रतिशत एडीएम कोर्ट, 2.8 प्रतिशत डीएम कोर्ट तथा 60 प्रतिशत केस उपखंड अदालतों मे लम्बित चल रहे हैं। पेंडेसी का ग्राफ 4 प्रतिशत केस अपील से सम्बन्धित हैं। 83 प्रतिशत केस एक साल से अधिक पुराने हैं। 10 प्रतिशत केस एक साल से पुराने हैं। 4 प्रतिशत केस 6 महीने पुराने हैं। 2 प्रतिशत केस 1 साल पुराने हैं। 14 प्रतिशत केस अपील के हैं। 35 प्रतिशत केस दावे से जुड़े हैं। 6.5 प्रतिशत केस निगरानी के हैं। प्रार्थना पत्र के केस 22 प्रतिशत है। बहस के केस 10 प्रतिशत। अंतिम बहस से जुड़े केस 4.3 प्रतिशत है। नोटिस सम्मन से जुड़े 14 प्रशित केस है।
20 में से 7 पद रिक्त
राजस्व मंडल में सदस्यों के पद रिक्त रहने से भी मुकदमों की सुनवाई प्रभावित होती है। राजस्व मंडल में सदस्यों के स्वीकृत 20 पद हैं। दो सदस्य न्यायिक तथा दो अधिवक्ता कोटे से आते हैं। यह चारों पद भरे हुए हैं। आइएएस कोटे में 5 सदस्य होते हैं। इनमें 1 सदस्य का पद भरा हुआ है जबकि दूसरा अंडर ट्रांसफर है। 11 सदस्य आरएएस कोटे से लगाए जाते हैं वर्तमान मे 7 सदस्य हैं। इस तरह 20 में से 13 सदस्य कार्यरत हैं। सदस्यों के 7 पद रिक्त चल रहे हैं। इससे मुकदमों की सुनवाई पर असर पड़ रहा है।
इसलिए बढ़ रही है पेंडेसी
राजस्व मंडल में पुराने केस निस्तारण की दर कम हंै जबकि नए केस अधिक दर्ज हो रहे हैं, इसलिए पेंडेंसी बढ़ रही है। मुकदमों के दर्ज होने के बाद विपक्षी को नोटिस तामील होने और निचली अदालतों से रिकॉर्ड आने में ही कई- कई साल लग जाते हैं। अवकाश के दिन, विरोध प्रदर्शन, शोक आदि के कारण न्यायिक कार्य स्थगित होने से भी भी मुकदमों की निस्तारण की गति धीमी है। राजस्व मंडल के अध्यक्ष भी मुकदमों की सुनवाई तथा पेंडिसी खत्म करने के लिए योजना बनाने के बजाय जयपुर से राजस्व मंडल चला रहे हैं। पुराने केसों के निस्तारण के लिए एकल व खंडपीठ का गठन तो हुआ है लेकिन पुराने केसों में वकील ही पैरवी करने से कतराते हैं।
फैक्ट फाइल
1- राजस्व मंडल में वर्तमान में 64 हजार से अधिक केस पेंडिंग हैं।2- पिछले डेढ़ साल से राजस्व मंडल में केवल नाममात्र के फैसले ही हो रहे हैं।3- एक बार स्टे आदेश जारी होने के बाद कई साल तक स्टे जारी रहता है।4- कोरोना, लॉकडाउन के चलते करीब तीन माह तो काम ही नहीं हो सका।
Published on:
14 Apr 2021 08:05 pm
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