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वृद्ध की हत्या के दस साल पुराने मामले में अभियुक्त को उम्रकैद

अजमेर. अपर जिला न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न मामलात) राजेश मीणा ने हत्या के एक दस साल पुराने मामले में मंगलवार को सुनाए फैसले में अभियुक्त जादूघर निवासी दीपचंद को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद व 40 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। मामले का मास्टर माइंड रामकुमार उर्फ साहिल मफरुर है। उसके स्थायी गिरफ़्तारी वारंट […]

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अजमेर

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Dilip Sharma

Apr 29, 2025

court news

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अजमेर. अपर जिला न्यायाधीश (महिला उत्पीड़न मामलात) राजेश मीणा ने हत्या के एक दस साल पुराने मामले में मंगलवार को सुनाए फैसले में अभियुक्त जादूघर निवासी दीपचंद को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद व 40 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। मामले का मास्टर माइंड रामकुमार उर्फ साहिल मफरुर है। उसके स्थायी गिरफ़्तारी वारंट जारी हैं।

सवा साल बाद मामले का पर्दाफाश

विशिष्ट लोक अभियोजक अशरफ बुलंद खान ने बताया कि मामले में परिवादी की ओर से जांच सही नहीं करने की शिकायत के बाद अलवर गेट थाने के हरिपाल सिंह को जांच सौंपी गई। पुलिस ने जांच में पाया कि बैरवा बस्ती में आरोपियों ने तकिया रखकर बुजुर्ग की हत्या की व जेवर नगदी लूटे। बाद में आरोपी उसकी अंतिम यात्रा में भी शामिल हुए। जांच में पुलिस ने पाया कि वारदात का मास्टर माइंड रामकुमार पेशेवर अपराधी है। जांच में मौके पर सामान बिखरा होना, कुंदे टूटे होना व आरोपियों के बरामद मोबाइल व आरोपी का साहिल के घर नशा करने आने जाने के तथ्यों से मामले की परत खुलती गई। करीब सवा साल बाद मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया।

प्रकरण के तथ्य

आर्य नगर, गुरुद्वारा वाली गली के सामने रहने वाले वसीम पुत्र मोहम्मद सलीम ने अदालत में इस्तगासा दायर किया। इसमें उसने राजकुमार उर्फ साहिल व अन्य को आरोपी बनाया। इसमें बताया कि दादाजी मोहम्मद नूर घर पर अकेले थे। 30 दिसम्बर 2015 को जब परिवादी जयपुर से शाम को घर पर आया तो उसके दादा पलंग पर अचेत अवस्था में थे, जिनके मुंह से खून आ रहा था। परिवादी ने अपने चाचा मोहम्मद रहीम उर्फ बाबू को सूचना दी। उनके बिस्तर के पास एक मोबाइल पड़ा था जबकि दादाजी का मोबाइल मौके पर नहीं मिला। कमरे में रखे बक्से का कुंदा टूटा था, इसमें सोने चांदी के जेवरात व पांच लाख रुपए नगदी व जेवरात गायब थे। परिवादी ने राजकुमार व अन्य पर वारदात का संदेह जताया। पुलिस ने मामले में प्राकृतिक मृत्यु का मामला मानते हुए जांच बंद कर दी। इसकी सूचना परिवादी को 5 जनवरी 2016 को हुई। तब उसने पुन सही जांच करने की मांग की।